2012 में एक युवती की साथ बलात्कार किया गया और जब वह पुलिस के पास गई तो उसके ऊपर बहुत से फर्जी मामले दर्ज कर उसे उल्टा फंसा दिया गया।
सियोल। बलात्कार की एक बहुचर्चित मामले में कोर्ट ने 6 साल बाद अंतिम फैसला सुना दिया है। 6 सालों तक मुसीबतें झेलने के बाद अदालत ने पीड़ित लड़की के हक़ में फैसला सुनाया है। आरोपी लड़के को पीछा करने और पीड़िता को डराने धमकाने के आरोप में दोषी करार देकर जेल भेज दिया गया है।आरोपी को रेप का दोषी करार देकर दो साल अतिरिक्त कैद की भी सजा सुनाई गई है। साथ ही अदालत ने युवती के खिलाफ लगाए गए तमाम आरोपों को खारिज कर दिया है।
क्या है मामला
2012 में एक युवती की साथ बलात्कार किया गया और जब वह पुलिस के पास गई तो उसके ऊपर बहुत से फर्जी मामले दर्ज कर उसे उल्टा फंसा दिया गया। लड़की के खिलाफ इतने मुकदमे दायर कर दिए जाते हैं कि उसे सफाई पेश करने के दौरान सालों तो लग ही जाते हैं।
लिफ्ट मांगने के बहाने लड़के ने लड़की को एक सुनसान जगह पर ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया। जब लड़की पुलिस के पास पहुंची तो पुलिस ने उससे उल्टे सवाल करना शुरू कर दिए। पुलिस ने पीड़िता पर उल्टा यह आरोप लगाया कि वह झूठ बोल रही है।काफी जद्दोजहद के बाद पुलिस को रिपोर्ट लिखना पड़ी। लड़की के खिलाफ मानहानि, झूठी गवाही देने, डराने और यौन उत्पीड़न करने के आरोप लगाए थे। लड़की के खिलाफ ये तमाम आरोप उस लड़के ने ही लगाए थे जिसके खिलाफ रेप का केस दर्ज करवाया गया था। बताया जा रहा है कि आरोपी युवक कोरिया फिल्म इंडस्ट्री में डायरेक्टर के रूप में काम करता था।
नौकरी गई, धमकियां मिलीं
पीड़िता को केस वापस लेने के लिए लगातार धमकियां दी जाती थीं। बलात्कारी और उसके दोस्तों की तरफ से पीड़िता और उसके उसके परिवार को जान से मार दिए जाने की धमकियां मिलने लगीं। कभी उसके घर पर पत्थर फेंके जाते तो कभी फोन पर धमकाया जाता। इसी बीच कानून पचड़ों के चलते लड़की की नौकरी भी चली गई। चूँकि आरोपी एक रसूख़ वाले परिवार से था इसलिए पुलिस ने भी उसको बचने की कोशिशें की।
फैसले की पूरे कोरिया में चर्चा
महिलाओं के हक में लड़ने वाली संस्था कोरिया वीमन्स हॉटलाइन की सचिव चो जे यिओन का कहना है कि बदला लेने की नीयत से दायर किये जाने वाले केसों के डर से ही रेप पीड़ित महिलाएं सामने नहीं आतीं। इन संस्थाओं ने लगातार सरकार पर क़ानूनी दबाव बनाये रखा है। बता दें कि इस साल जुलाई में दक्षिण कोरिया के विधि मंत्रालय ने निर्देश जारी किया है कि यौन उत्पीड़न के पीड़ितों के खिलाफ दायर किए गए आरोपों की जांच तब तक न की जाए जब तक यौन उत्पीड़न का केस किसी नतीजे पर न पहुंचे।