जानिए 6 मुखी गणेश रुद्राक्ष के चमत्कारी फायदे, पहनने की सही विधि और कैसे यह आपके करियर, पढ़ाई और आत्मविश्वास को नई दिशा देता है।
6 Mukhi Ganesh Rudraksha Benefits : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सभी को दो चीजों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है सही निर्णय लेने वाली बुद्धि और रास्ते की बाधाओं से मुक्ति। क्या आप जानते हैं कि शास्त्रों में एक ऐसा दुर्लभ रत्न बताया गया है जो भगवान गणेश और कार्तिकेय दोनों की शक्तियों को समेटे हुए है?
हम बात कर रहे हैं 6 मुखी गणेश रुद्राक्ष की। यह सिर्फ एक मनका नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सफलता की एक चाबी है। एस्ट्रोलॉजर शरद शर्मा से जानते हैं यह कैसे आपके जीवन को बदल सकता है।
आम रुद्राक्ष के विपरीत, गणेश रुद्राक्ष की बनावट में प्राकृतिक रूप से एक छोटी सी सूंड निकली होती है। जब इसमें 6 धारियां (मुख) होती हैं, तो यह और भी शक्तिशाली हो जाता है।
अधिष्ठाता देव: भगवान गणेश (विघ्नहर्ता) और भगवान कार्तिकेय (साहस के प्रतीक)।
संबद्ध ग्रह: शुक्र (Venus), जो सुख-सुविधा और आकर्षण का कारक है।
अगर आप एक छात्र हैं या किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो यह रुद्राक्ष आपके लिए वरदान साबित हो सकता है।
यह दिमाग के एनालिटिकल (विश्लेषणात्मक) हिस्से को सक्रिय करता है।
पढ़ते समय एकाग्रता (Focus) बढ़ाता है और भूलने की बीमारी को कम करने में मदद करता है।
वैल्यू एडिशन: हालिया न्यूरोलॉजिकल रिसर्च भी मानती हैं कि रुद्राक्ष के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक गुण शरीर के रक्त संचार और मानसिक शांति पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
ऑफिस की राजनीति हो या बिजनेस में आ रही रुकावटें, 6 मुखी गणेश रुद्राक्ष धारक को एक अलग ही मैग्नेटिक पर्सनालिटी देता है।
डर से मुक्ति: जो लोग स्टेज पर बोलने या प्रेजेंटेशन देने से कतराते हैं, उनके भीतर यह गजब का आत्मविश्वास भर देता है।
लीडरशिप क्वालिटी: यह मंगल और शुक्र के संतुलन से व्यक्ति को एक बेहतर टीम लीडर बनाता है।
चूंकि यह साक्षात गणपति का स्वरूप है, इसलिए इसे धारण करने वाले के आसपास की नकारात्मक ऊर्जा खुद-ब-खुद दूर होने लगती है। यह न केवल बाहरी शत्रुओं से बचाता है, बल्कि हमारे भीतर के 'आलस्य' और 'भ्रम' रूपी शत्रुओं को भी खत्म करता है।
जरूरी बात: धारण करने की सही विधि
रुद्राक्ष का पूरा लाभ तभी मिलता है जब उसे सही विधि से पहना जाए। इसे धारण करने से पहले 'ॐ गं गणपतये नमः' और 'ॐ ह्रीं हुं नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए। सोमवार या बुधवार के दिन इसे गंगाजल से शुद्ध करके पहनना सबसे उत्तम माना जाता है।
प्रो टिप: हमेशा लैब सर्टिफिकेट वाला असली रुद्राक्ष ही खरीदें, क्योंकि कांच या प्लास्टिक के मनकों से कोई लाभ नहीं मिलता।
अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।