Aaj Ka Panchang 10 May 2026 : आज का पंचांग 10 मई 2026 रविवार: जानें शुभ चौघड़िया, राहुकाल, दिशा शूल, तिथि, नक्षत्र, योग, करण, पंचक, विवाह मुहूर्त, राशिफल संकेत और आज के व्रत-त्योहार की पूरी जानकारी।
Aaj Ka Panchang 10 May 2026 : रविवार, 10 मई 2026 का पंचांग कई शुभ संयोगों से युक्त है। आज चर, लाभ, अमृत और शुभ चौघड़िया में मांगलिक एवं नए कार्य प्रारम्भ करना लाभकारी माना गया है। पंडित मुकेश भारद्वाज के अनुसार आज धनिष्ठा नक्षत्र, ब्रह्म योग और पंचक प्रारम्भ होने जैसे विशेष योग भी बन रहे हैं। आज मदर्स डे, दादूदयाल पुण्य दिवस और त्रिलोकनाथ अष्टमी जैसे विशेष पर्व भी मनाए जाएंगे। यात्रा करने से पहले दिशा शूल और राहुकाल का विशेष ध्यान रखें। यहां पढ़ें आज की तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, चंद्र राशि परिवर्तन और पूरे सप्ताह के प्रमुख व्रत-त्योहारों की विस्तृत जानकारी।
| चौघड़िया | समय | कार्य हेतु उपयुक्तता |
|---|---|---|
| चर | सुबह 7:25 बजे – 9:05 बजे | शुभ कार्य प्रारम्भ कर सकते हैं |
| लाभ | सुबह 9:05 बजे – 10:44 बजे | शुभ एवं लाभकारी कार्यों के लिए उत्तम |
| अमृत | सुबह 10:44 बजे – दोपहर 12:23 बजे | अत्यंत शुभ एवं मंगलकारी |
| शुभ | दोपहर 2:02 बजे – 3:42 बजे | सभी प्रकार के शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त |
दिशा शूल - आज पश्चिम दिशा में दिशा शूल रहेगा । इसलिए आज पश्चिम दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए।
उपाय - यदि पश्चिम दिशा में यात्रा करना आज आवश्यक हो और टालना संभव ना हो तो यात्रा प्रारंभ करने से पूर्व शुद्ध घी अथवा शिखरन या खीर खाकर, जल से भरे कलश का शगुन लेकर यात्रा प्रारंभ करें।
राहु काल वेला - (मध्यमान से) दिन 4.30 से 6.00 तक
उपाय - राहु काल में शुभ कार्यों का प्रारंभ नहीं करना चाहिए। यदि कार्य को टाला जाना संभव ना हो तो मिष्ठान्न का सेवन करके ही कार्य प्रारंभ करें। इससे राहुकाल का दुष्प्रभाव कम होगा।
तिथि – अष्ठमी तिथि दिन 3.07 तक होगी तदुपरान्त नवमी तिथि होगी ।
नक्षत्र – धनिष्ठा नक्षत्र रात्रि 12.50 तक रहेगा तदुपरान्त शतभिषा नक्षत्र होगा ।
योग – ब्रह्म योग रात्रि 2.09 तक रहेगा तदुपरान्त ऐन्द्र योग रहेगा ।
करण – कौलव करण दिन 3.07 तक रहेगा तदुपरान्त तैतिल करण रहेगा।
व्रत / दिवस विशेष – मेला चनानी माताजी, त्रिलोकनाथ अष्टमी (बंगाल), दादूदयाल पुण्य दिवस, पंचक प्रांरभ दिन 12-13 से, मदर्स डे, विवाह मुहूर्त धनिष्ठा नक्षत्र में
चन्द्रमा – आज दिन 12.13 तक मकर राशि में होगा तदुपरान्त कुंभ राशि में प्रवेश होगा ।
11.5.2026 सोमवार - भद्रा रात्रि 3-09 से प्रारम्भ, सूर्य का कृत्तिका नक्षत्र में प्रवेश रात्रि 7-31 पर, मंगल का अश्विनी नक्षत्र मेष राशि में प्रवेश दिन 12-39 पर, हर्षल का कृत्तिका नक्षत्र चरण 4 में प्रवेश रात्रि 3-12 पर, पंचक, कुमारयोग रात्रि 1-29 से प्रारम्भ,
12.5.2026 मंगलवार – भद्रा दिन 2-53 तक, पंचक, वैधति पुण्यं, अन्तर्राष्ट्रीय नर्सेज दिवस, कुमारयोग रात्रि 1-17 तक, सर्वार्थसिद्धि योग रात्रि 1-17 से सूयोंदय तक
13.5.2026 बुधवार - बुध ग्रह का कृत्तिका नक्षत्र में प्रवेश दिन 11-44 पर, अपरा एकादशी व्रत, भद्रकाली एकादशी (पंजाब), जलक्रीड़ा एकादशी (उड़ीसा), पंचक, गंडमूल प्रारंभ रात्रि 12-18 से, राजयोग दिन 1-30 से रात्रि 12-18 तक
14.5.2026 गुरुवार - बुध ग्रह का वृष राशि में प्रवेश रात्रि 12-31 पर, गुरु का पुनर्वसु नक्षत्र चरण 3 में प्रवेश प्रातः 6-36 पर, शुक्र ग्रह का मिथुन राशि में प्रवेश दिन 10-53 पर, प्रदोष व्रत, मधुसूदन द्वादशी, मुनि अनन्तनाथ जयंती, वट सावित्री व्रत प्रारंभ तीन दिन का, पचक रात्रि 10-34 तक, विवाह मुहूर्त्त्त रेवती नक्षत्र में, गंडमूल संपूर्ण दिनरात्रि, सर्वार्थसिद्धि योग सूर्योदय से संपूर्ण दिनरात्रि
15.5.2026 शुक्रवार - भद्रा दिन 8-32 से रात्रि 6-52 तक, ज्येष्ठ संक्रांति, सूर्य का वृष राशि में प्रवेश प्रातः 6-22 पर, संक्रांति पुण्यकाल दिन 12-46 तक, मास शिवरात्रि, सावित्री चतुर्दशी (बंगाल), वट सावित्री व्रत दूसरा दिन, मुनि शांतिनाथ जयंती, चतुर्दशी तिथि क्षय, मेला डूंगरी जातर मनाली में प्रारंभ (हि.प्र.), अंतर्राष्टरीय परिवार दिवस, गंडमूल रात्रि 8-15 तक, सर्वार्थसिद्धि योग रात्रि 8.15 तक
16.5.2026 शनिवार – बड़पूजन अमावस्या, वट सावित्री व्रत समाप्त, देवपितृकार्य अमावस्या, संत ज्ञानेश्वर जयंती, शनैश्चरी अमावस्या, शनि जयंती, भावुका अमावस्या, फलहारिणी कलिका पूजन (बंगाल)
17.5.2026 रविवार – शनि का रेवती नक्षत्र चरण 1 में प्रवेश दिन 2-40 पर, ज्येष्ठ अधिक (पुरुषोत्तम) मास प्रारंभ, विश्व दूर संचार दिवस, श्री गंगादशाश्व मेघ स्नान प्रारंभ
मकर राशि के स्वामी शनि देव हैं. ये राशि शांत स्वभाव की धैर्यवान व सहनशील होती हैं परंतु ये लोभी भी होते हैं। इनका व्यवहार गहन विचार करने वाला व क्षमाशील होता हैं। ये लोग अच्छे व्यापारी होते हैं। अधिकतर तोल-मोल कर बात करते हैं और एकांतप्रिय, तपस्या व तप पसंद करते हैं। ऐसे जातक गंभीर, भावुक, संवेदनशील, उच्चाभिलाषी, सेवाधर्मी, मननशील एवं धार्मिक प्रवृत्ति वाले होते हैं।
कुम्भ का स्वामी भी शानि हैं। इनका स्वभाव दयावान, निस्वार्थ, स्वतंत्रताप्रिय, कल्पना शील और देश-विदेश घूमने के शौकीन होते हैं। ये लोग सेल्समेन, वकील व जज होते हैं। ये जातक उच्चाधिकारी, उच्चपदासीन, क्रय-विक्रय, प्रोफेसर, जज-वकील, उच्चपदवी या धनी व्यापारी होते हैं। ये जातक बुद्धिमान, साधन-सम्पन्न, तीव्र स्मरण-शक्ति एवं गंभीर प्रकृति वाले होते हैं। ये जातक दुसरो के प्रति दयाभाव रखने वाला, परोपकारी एवं निस्वार्थ भाव से सेवा करने में तत्प्रर होते हैं। ये जातक स्वाभिमानी, स्वतंत्रताप्रिय एवं नए-नए मित्र बनाने में भी पीछे नहीं हटते। जातक उद्योगी, उधमी, परिश्रमी और इनमें प्रबन्धात्मक योग्यता विशेष होती हैं।