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Vat Savitri Vrat 2026 Paran Rules: सावित्री व्रत खोलने से पहले जान लें सही विधि, नियम पालन करने पर सुहागिनों को मिलता है लाभ

Vat Savitri Vrat Rules: सुहागिन महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत बेहद खास माना जाता है। ऐसे में इस व्रत से जुड़े कई नियमों का पालन करना जरूरी होता है, जिनमें व्रत पारण के नियमों का ध्यान रखना भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

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भारत

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MEGHA ROY

May 09, 2026

Hindu vrat rituals

Vat Savitri Vrat Date 2026| Chatgpt

Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए आस्था और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं। मान्यता है कि विधि-विधान और श्रद्धा के साथ किया गया यह उपवास वैवाहिक रिश्ते को मजबूत बनाता है। खासतौर पर जो महिलाएं पहली बार वट सावित्री व्रत रखने जा रही हैं, उनके लिए कुछ जरूरी नियमों का पालन करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं व्रत पारण से जुड़े जरूरी नियम और सावधानियां, जिनका ध्यान रखना शुभ फल देने वाला माना जाता है।

वट सावित्री व्रत 2026 शुभ मुहूर्त

  • अमावस्या तिथि प्रारंभ: 16 मई 2026, सुबह 05:11 बजे
  • अमावस्या तिथि समाप्त: 17 मई 2026, रात 01:30 बजे
  • पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 07:12 बजे से 08:24 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: 11:50 बजे से 12:45 बजे तक

पारण से पहले करें ये जरूरी काम

व्रत खोलने से पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। स्नान के जल में गंगाजल मिलाना शुभ माना जाता है। इसके बाद साफ और हल्के रंग के वस्त्र धारण करें तथा विवाहित महिलाएं सोलह श्रृंगार करें। फिर वट वृक्ष की विधिपूर्वक पूजा कर सावित्री-सत्यवान की कथा सुनें या पढ़ें।

पूजा के बाद घर के मंदिर में दीप जलाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का स्मरण करें। परिवार के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना भी शुभ माना जाता है।

कैसे करें व्रत का पारण

पारण हमेशा सात्विक भोजन से करना चाहिए। सबसे पहले जल ग्रहण करें, ताकि शरीर में पानी की कमी पूरी हो सके। इसके बाद फल, मखाने, खीर या हल्की मिठाई का सेवन करें। व्रत खोलते ही भारी, तला-भुना या मसालेदार भोजन खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, पारण प्रसाद से करने पर व्रत का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। पारण के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराना और दान-दक्षिणा देना भी शुभ माना जाता है।

पारण के समय भूलकर भी न करें ये गलतियां

  • बिना स्नान किए व्रत न खोलें
  • तामसिक भोजन का सेवन न करें
  • क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें
  • वट वृक्ष की पूजा किए बिना पारण न करें
  • जरूरत से ज्यादा भारी भोजन तुरंत न खाएं

पारण का धार्मिक महत्व

धर्म शास्त्रों में पारण को व्रत का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण माना गया है। सही विधि से पारण करने से न केवल व्रत पूर्ण होता है, बल्कि घर में सुख-शांति, दांपत्य प्रेम और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।