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Kaal Bhairav Jayanti 2025 : कालभैरव जयंती के दिन व्रत करने से क्या होता है , ये उपाय दे सकते हैं समस्याओं से राहत

Kaal Bhairav Jayanti 2025 : जानें कालभैरव जयंती 2025 की सही तिथि (12 नवंबर) और शुभ मुहूर्त। कालाष्टमी पर कठिन व्रत करने से क्या लाभ होता है? डर, शत्रु और समस्याओं से राहत पाने के लिए काल भैरव के 5 विशेष अनुष्ठान और उपायों की पूरी जानकारी।

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Nov 11, 2025
Kalashtami 2025 Date : कालाष्टमी 2025 (फोटो सोर्स: AI image@Gemini)

Kaal Bhairav Jayanti 2025 : काल भैरव जयंती या कालाष्टमी भगवान भैरव के लिए खास दिन है। भगवान भैरव, शिव का उग्र रूप हैं जिन्हें लोग परम ब्रह्म या सर्वोच्च शक्ति मानते हैं। वो गलत काम करने वालों को सजा भी देते हैं और अपने भक्तों की हिफाजत भी करते हैं। मान्यता है कि 64 भैरवों के ऊपर 8 भैरवों का नेतृत्व है, और सभी के अधिपति स्वयं काल भैरव हैं। हिंदू पंचांग के हिसाब से, हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कालाष्टमी मनाई जाती है। इसी दिन भक्त उपवास रखते हैं और भगवान भैरव की पूजा करते हैं।

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काल भैरव जयंती | Kaal Bhairav ​​Jayanti

दिलचस्प बात ये है कि उत्तर भारत में सबसे अहम कालाष्टमी काल भैरव जयंती मार्गशीर्ष (दिसंबर-जनवरी) में आती है, जबकि दक्षिण भारत वाले इसे कार्तिक (नवंबर-दिसंबर) में मनाते हैं। फिर भी दोनों जगहों पर ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक ये पर्व एक ही दिन पड़ता है।

लोग इसे भैरव अष्टमी या काल भैरव अष्टमी के नाम से भी जानते हैं। मान्यता है, इसी दिन भगवान शिव ने काल भैरव के रूप में अवतार लिया था। मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को ये पर्व आता है, और इसी दिन काल भैरव की पूजा का सबसे अच्छा समय माना जाता है। देशभर के काल भैरव मंदिरों में इस दिन काफी धूमधाम रहती है। वाराणसी में तो भक्त आठ दिनों तक, आठ अष्टभैरव मंदिरों की यात्रा करते हैं।

2025 में काल भैरव जयंती बुधवार 12 नवंबर को है, अष्टमी तिथि की शुरुआत 11 नवंबर को रात 11:08 बजे होगी और ये 12 नवंबर को रात 10:58 बजे खत्म हो जाएगी।

कालाष्टमी का उपवास | Fasting on Kalashtami

अब बात व्रत की करें तो, कालाष्टमी का उपवास थोड़ा कठिन है। अगर आप इस व्रत का पूरा फल चाहते हैं तो सिर्फ खाने-पीने से नहीं, पूरी रात जागकर भैरव की पूजा करनी चाहिए। कोशिश करें कि कुछ भी न खाएं, लेकिन अगर जरूरी लगे तो फल या दूध ले सकते हैं। अगले दिन पूजा करने के बाद ही व्रत खोलें।

लोग मानते हैं कि इस दिन भगवान भैरव की पूजा करने से मनोकामना पूरी होती है, डर दूर होता है, और दुश्मनों से शांति मिलती है। भगवान भैरव की कृपा से जीवन में कई मुश्किलें आसान हो जाती हैं।

इस दिन भगवान शिव के मंदिरों को सजाया जाता है, संध्या को खास पूजा होती है, और रात में निशा काल भैरव की पूजा की जाती है। तंत्र साधना करने वालों के लिए भी ये रात बहुत मायने रखती है।

कालाष्टमी अनुष्ठान और उपाय | Kalashtami rituals and remedies

  • अगर आप कालाष्टमी के अनुष्ठान करना चाहते हैं, तो सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और खुद को शुद्ध करें।
  • भगवान भैरव की पूजा करें, उनसे आशीर्वाद और क्षमा मांगें।
  • व्रत रखें, मन में शिव के मंत्रों का जाप करें।
  • शाम को मंदिर जाएं और सच्चे मन से प्रार्थना करें।
  • इस दिन पूर्वजों के लिए भी पूजा होती है, ताकि उनकी आत्मा को शांति मिले।
  • ब्राह्मणों को भोजन, कपड़े या धन दान करें।
  • काले कुत्तों को दूध, दही या कुछ स्वादिष्ट चीजें खिलाएं क्योंकि इन्हें भगवान काल भैरव का वाहन माना जाता है।

यह ज्योतिषीय आलेख पूरी तरह से सामान्य जानकारी, मनोरंजन और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। ज्योतिष, अंकशास्त्र, हस्तरेखा और वास्तु से संबंधित सभी भविष्यवाणियां और निष्कर्ष पारंपरिक ग्रंथों और प्रचलित मान्यताओं पर आधारित हैं।

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Published on:
11 Nov 2025 03:36 pm
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