धर्म/ज्योतिष

17 जुलाई को कर्क राशि में प्रवेश करेंगे सूर्य, इस मंत्र के जाप से मिलेगा सूर्यदेव का आशीर्वाद, जानें क्या करें

Karka Sankranti 2026- 17 जुलाई 2026 को सूर्य कर्क राशि में प्रवेश करेंगे और इसी के साथ दक्षिणायन की शुरुआत होगी।जानिए इस दिन क्या करें, क्या न करें और इसका आध्यात्मिक महत्व।
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Jul 15, 2026
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Karka Sankranti 2026: ज्योतिषाचार्य से जानें कर्क संक्रांति पर किस मंत्र का करें जाप (फोटो सोर्स- chatgpt)

Karka Sankranti Mantra: 17 जुलाई 2026 को सूर्य मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। इसी खगोलीय घटना को कर्क संक्रांति (Karka Sankranti 2026) कहा जाता है, जो सनातन धर्म में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन से दक्षिणायन का आरंभ होता है, जिसे देवताओं की रात्रि की शुरुआत भी कहा गया है। इसके साथ ही साधना, जप, तप, दान और पितृ कार्यों का महत्व बढ़ जाता है। आइए ज्योतिषाचार्य धर्मेंद्र शास्त्री से जानते हैं कर्क संक्रांति 2026 की तिथि, धार्मिक महत्व, पूजा-विधि, दान और इस दिन किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

सूर्य कर्क राशि में करेंगे प्रवेश

17 जुलाई 2026 की दोपहर 11 बजे सूर्यदेव मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। इस दिन को कर्क संक्रांति कहते हैं। इसी दिन से दक्षिणायन भी आरंभ होता है।

क्या है दक्षिणायन का अर्थ?

दक्षिणायन का अर्थ है कि सूर्य का दक्षिण दिशा की ओर गमन। यह 6 माह की अवधि होती है जो कर्क संक्रांति से मकर संक्रांति (जनवरी) तक चलती है। शास्त्रों में इसे देवताओं की रात्रि कहा गया है।

4 महीने की निद्रा में जाते है भगवान विष्णु, इस मंत्र का करें जाप

आचार्य धर्मेंद्र शास्त्री ने बताया इसी दिन से भगवान विष्णु 4 माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। चातुर्मास का आरम्भ होता है। वर्षा ऋतु का आगमन। दिन छोटे और रातें बड़ी होने लगती हैं।किसानों के लिए बुआई का महत्वपूर्ण समय। धरती माता नई फसल के लिए तैयार होती है। दक्षिणायन को पितृ-कार्यों के लिए उत्तम माना गया है। प्रातः स्नान कर सूर्य को अर्घ्य दें।

"ॐ घृणि सूर्याय नमः" इस मंत्र का जाप करें। तिल, गुड़, वस्त्र, छाता, चप्पल, अन्न का दान विशेष फलदायी है। दक्षिणायन शुरू होते ही पितरों के लिए तर्पण-श्राद्ध का महत्व बढ़ जाता हैं।शाम को घर-मंदिर में दीप जलाएं। यह अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। चावल-खिचड़ी, हरी सब्जियां ग्रहण करें। इस दिन बैंगन खाना वर्जित माना जाता है।

दक्षिणायन का आध्यात्मिक संदेश

उत्तरायण यदि कर्म का काल है तो दक्षिणायन साधना का काल माना जाता है। देवताओं की रात्रि में जब बाहरी प्रकाश कम होता है, तब भीतर का दीप जलाने का समय आता है। यह काल जप, तप, व्रत, ध्यान और आत्म-चिंतन के लिए सर्वश्रेष्ठ है।सूर्य दक्षिण की ओर झुकता है, वैसे ही हमें अहंकार छोड़कर विनम्र बनना है। जैसे दिन छोटे होते हैं, वैसे ही हमें अपने दोषों को छोटा करना है।

Updated on:
15 Jul 2026 11:04 am
Published on:
15 Jul 2026 11:04 am