
Lawyer Teacher Murder Update Auraiya: उत्तर प्रदेशके औरैया में वकील मंजुल चौबे और उनकी सरकारी शिक्षिका बहन सुधा की हत्या के मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। MP-MLA कोर्ट ने समाजवादी पार्टी के पूर्व MLC कमलेश पाठक समेत 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। कोर्ट थोड़ी देर में दोषियों की सजा पर फैसला सुना सकती है। फैसले को देखते हुए कोर्ट परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
15 जनवरी 2020 को मंजुल चौबे और उनकी बहन सुधा की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। करीब 6 साल से चल रहे इस मामले में 900 से अधिक तारीखें पड़ीं और दोनों पक्षों की ओर से 72 गवाह पेश किए गए।
कमलेश पाठक और मंजुल चौबे कभी बेहद करीबी दोस्त हुआ करते थे। मंजुल चौबे को कमलेश पाठक की परछाई और उनका अंगरक्षक तक कहा जाता था। जब मंजुल चौबे औरैया के तिलक महाविद्यालय से छात्र संघ अध्यक्ष चुने गए थे, तब कमलेश पाठक उनके प्रमुख समर्थकों में शामिल थे। दोनों की दोस्ती लंबे समय तक चर्चा में रही।
दोनों के रिश्तों में दरार 2006 के नगर पालिका चुनाव के दौरान आई। मंजुल चौबे चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन उन्हें कमलेश पाठक का सहयोग नहीं मिला। इसके बाद दोनों के बीच दूरी बढ़ने लगी। बाद में मंजुल चौबे भाजपा नेताओं के करीब आ गए, जबकि कमलेश पाठक सपा समर्थक रहे। राजनीतिक दूरी बढ़ने के साथ दोनों की पुरानी दोस्ती धीरे-धीरे वर्चस्व की लड़ाई में बदल गई।
विवाद पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास स्थित करीब एक बीघा जमीन को लेकर था। बताया जाता है कि इस जमीन से कमलेश पाठक और मंजुल चौबे के घर की दूरी 500 मीटर से भी कम थी। आसपास के लोगों के मुताबिक, मंजुल का घर भी कमलेश पाठक ने बनवाया था। दोनों पहले इसी जमीन पर बैठकर चौपाल लगाया करते थे, लेकिन रिश्तों में खटास आने के बाद यही जमीन दोनों पक्षों के बीच विवाद का कारण बन गई।
जैसे-जैसे दोनों के बीच दूरी बढ़ी, उनके समर्थकों के बीच भी तनाव बढ़ने लगा। आरोप है कि कमलेश पाठक के लोग मंजुल चौबे पर कमेंट करते थे और उनके परिवार को भी विवाद में घसीटा जाता था। इन घटनाओं के बाद दोनों पक्षों के बीच दुश्मनी और गहरी होती चली गई।
15 जनवरी 2020 को कमलेश पाठक उसी विवादित जमीन पर कुर्सी डालकर बैठे थे। इसी दौरान मंजुल के पिता ने कथित तौर पर उन्हें बुरा-भला कहा और कुर्सी से नीचे गिरा दिया। विवाद बढ़ने पर दोनों पक्षों के लोग मौके पर पहुंच गए। कमलेश पाठक का भाई संतोष और गनर भी वहां पहुंच गया। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी बढ़ी और फायरिंग हो गई। फायरिंग में मंजुल चौबे और उनकी बहन सुधा को गोली लगी और दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
डबल मर्डर के मामले में पुलिस ने जांच के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। मामले में कुल 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था। 11 जुलाई 2020 को इनमें से 10 आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई थी। एक आरोपी के नाबालिग होने के कारण उसका मामला जुबेनाइल कोर्ट भेज दिया गया। गनर अवनीश प्रताप सिंह को गैंगस्टर के मामले में बरी कर दिया गया था, लेकिन हत्या का मुकदमा उसके खिलाफ जारी रहा।
डबल मर्डर मामले में कोर्ट ने जिन 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है, उनमें शामिल हैं:
-पूर्व मंत्री और MLC कमलेश पाठक
-पूर्व ब्लॉक प्रमुख संतोष पाठक
-रामू पाठक
-कुलदीप अवस्थी
-विकल्प अवस्थी
-राजेश शुक्ल
-शिवम अवस्थी
-आशीष दुबे
-रविन्द्र चौबे उर्फ लल्ला
-लवकुश सविता
गनर अवनीश प्रताप सिंह के खिलाफ हत्या का मामला जारी है।
डबल मर्डर के बाद प्रशासन ने कमलेश पाठक और उनके परिवार से जुड़ी करोड़ों रुपये की संपत्तियों पर भी कार्रवाई की। प्रशासन के मुताबिक, कमलेश पाठक की 36.15 करोड़ रुपये, संतोष पाठक की 9.75 करोड़ रुपये और रामू पाठक की 7.51 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई।
औरैया के भड़ारीपुर गांव के रहने वाले राम औतार पाठक के बेटे कमलेश पाठक कम उम्र में ही राजनीति में प्रभावशाली नाम बन गए थे। वह सपा से विधायक भी रहे। बताया जाता है कि उन्होंने जनता दल के विधायकों को तोड़कर मुलायम सिंह यादव की सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके बाद वह मुलायम सिंह के करीबी नेताओं में गिने जाने लगे।
कमलेश पाठक 1990 में विधान परिषद सदस्य रहे। इसके बाद 1991 में उन्हें दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री बनाया गया। साल 2002 में उन्होंने डेरापुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर जीत हासिल की और विधायक बने। 2007 में उन्होंने दिबियापुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 2012 में उन्होंने सिकंदरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन इस चुनाव में भी उन्हें हार मिली।
चुनावी हार के बावजूद 2013 में समाजवादी पार्टी की सरकार ने कमलेश पाठक को रेशम विभाग का अध्यक्ष बनाया और उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा दिया। इसके बाद 17 मई 2015 को समाजवादी पार्टी ने उन्हें MLC प्रत्याशियों की सूची में शामिल किया। वह विधान परिषद सदस्य चुने गए।
मंजुल चौबे और उनकी बहन सुधा की हत्या के करीब छह साल बाद MP-MLA कोर्ट ने मामले में 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। अब सभी की सजा पर कोर्ट का फैसला आना बाकी है। फैसले को देखते हुए कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है।