
Kamlesh Pathak Life Imprisonment: उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के चर्चित मंजुल-सुधा दोहरे हत्याकांड में एमपी-एमएलए कोर्ट (MP-MLA Court) ने बड़ा फैसला सुनाते हुए समाजवादी पार्टी (SP) के पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक, उनके दो सगे भाइयों संतोष पाठक और रामू पाठक सहित 10 दोषियों को उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है।
यह पूरा मामला मार्च 2020 का है। औरैया शहर के आर्य नगर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर की लगभग एक बीघा कीमती जमीन को लेकर विवाद हुआ था। 15 मार्च, 2020 को जमीन पर कब्जे और वर्चस्व को लेकर दो पक्षों में विवाद बढ़ गया। इस दौरान हुई अंधाधुंध गोलीबारी में अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी बहन सुधा चौबे की मौके पर ही गोली लगने से मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए थे।
एक समय पर कमलेश पाठक और मंजुल चौबे के बीच काफी गहरी दोस्ती थी। छात्रसंघ चुनाव में कमलेश पाठक ने मंजुल चौबे का समर्थन किया था। हालांकि, राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और नगर पालिका चुनाव के दौरान दोनों के रिश्तों में खटास आ गई। बाद में मंदिर की जमीन पर कब्जे के प्रयास को लेकर यह दुश्मनी खूनी संघर्ष में बदल गई।
कमलेश पाठक औरैया के भड़ारीपुर गांव के निवासी हैं। वे कम उम्र में ही राजनीति में सक्रिय हो गए थे और समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के करीबी माने जाते थे।
- 1990 में उन्हें सपा की ओर से उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) का सदस्य बनाया गया था।
- 1991 और 2013 में उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा भी मिला।
- 2002 में वे डेरापुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे।
हत्याकांड के बाद पुलिस प्रशासन ने गैंगस्टर एक्ट (Gangsters Act) के तहत कार्रवाई करते हुए कमलेश पाठक और उनके परिवार की 50 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति भी जब्त की थी। लगभग 6 साल तक चले इस मुकदमे में 72 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिसके बाद अदालत ने सभी मुख्य आरोपियों को दोषी ठहराते हुए यह फैसला सुनाया।