औरैया

अखिलेश-डिंपल को लेकर आखिर क्यों नाराज हुई थीं मायावती, वो किस्सा जिसके बारे में नहीं जानता कोई भी

बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी गठबंधन कर यूपी की राजनीति में एक नया अध्याय लिखने जा रहे हैं।
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Jan 26, 2019
Mayawati dimple
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लखनऊ. बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी गठबंधन कर यूपी की राजनीति में एक नया अध्याय लिखने जा रहे हैं। दोनों पार्टी प्रमुखों मायावती व अखिलेश यादव के बीच रिश्ते फिलहाल मधुर हैं और दोनों एक-दूसरे पर भाजपा द्वारा किए जा रहे प्रहार का एक साथ जवाब दे रहे हैं। जिससे पार्टी में एक-दूसरे के प्रति विश्वास और मजबूती हो रहा है। वैसे मायावती व अखिलेश राजनीति में काफी परिपक्व हैं, लेकिन राजनीति से इतर भी दोनों प्रमुखों में शिष्टाचार व आपसी सौहार्द के गुण कूट-कूट भरे हैं। इसकी बानगी आज नहीं बल्कि तभी पेश हो गई थी जब अखिलेश नए-नए राजनीति में आए थे। इसका एक किस्सा 18 सालों तक मायावती के सुरक्षा अधिकारी रहे पदम सिंह ने एक मीडिया चैलन को इंटरव्यू में बताया।

जब फ्लाईट में अखिलेश-डिंपल ने मायावती को किया नमस्ते-

साल 2002 में बसपा सुप्रीमो मायावती दिल्‍ली जाने वाली एक फ्लाइट के बिजनेस क्‍लास में थीं। 29 वर्षीय अखिलेश यादव, जिन्‍होंने बतौर सांसद अपना पहला चुनाव जीता था, उसी फ्लाईट में आए। साथ में थीं उनकी पत्‍नी डिंपल यादव। दोनों ने मायावती को नमस्‍ते किया, लेकिन मायावती उन्‍हें नहीं पहचाना थी, इसलिए कोई जवाब नहीं दिया। पदम सिंह ने आगे कहा बताया कि दिल्‍ली एयरपोर्ट पर उतरने के बाद बहन मायावती ने उनसे उस नौजवान जोड़े के बारे में पूछा। लेकिन पदम सिंह भी 1995 के गेस्‍ट हाउस कांड में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा मायावती पर किए गए हमला से बेहद नाराज थे। ऐसे में उन्होंने अखिलेश-डिंपल पर ज्यादा जोर न देते हुए लापरवाही के साथ कहा कि वे दोनों मुलायम सिंह जी के बेटे-बहू अखिलेश और डिंपल यादव हैं।

मायावती हुईं गुस्सा-

मायावती यह सुन गुस्‍सा हो गईं और सिंह को डांटकर कहा "तुमने मुझे क्‍यों नहीं बताया? तुम्‍हें मुझे दोनों के बारे में चुपचाप से बता देना चाहिए था। मायावती चिंता में थी कि वे दोनों उनके बारे में क्या सोच रहे होंगे। मायावती बोलीं कि उनके बेटे-बहू ने मुझे नमस्‍ते किया और मैनें सही से उनका अभिवादन भी नहीं किया। तुमने मुझे इस बारे में कुछ नहीं बताया। वो लड़का व उसकी पत्‍नी मेरे बारे में क्‍या सोच रही होगी? यह ठीक नहीं हुआ।

यह स्वभाव है हमारे राजनीतिक दिग्गजों का। नतीजे चाहे कुछ भी, दल चाहे आर-पार की लड़ाई लड़ रहे हों, लेकिन निजी जीवन में आपसी सौहार्द निभाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहता है। चुनाव के बाद भी ऐसे ही सौहार्द की उम्मीद है।

Updated on:
26 Jan 2019 05:45 pm
Published on:
26 Jan 2019 05:43 pm