Judge Cycling Viral Video: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील से प्रेरित होकर औरंगाबाद के जिला जज राजीव रंजन कुमार आलीशान सरकारी गाड़ी छोड़ कर अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ साइकिल से अदालत पहुंचे। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसे जनता से खूब सराहना मिल रही है।
Judge Cycling Viral Video: वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का असर अब बिहार की न्यायपालिका में भी दिखने लगा है। औरंगाबाद के जिला और सत्र न्यायाधीश राजीव रंजन कुमार ने पर्यावरण और राष्ट्र के हित में एक ऐसी मिसाल कायम की है, जिसकी चर्चा इस समय पूरे राज्य में हो रही है। बुधवार को जज अपनी सिक्योरिटी टीम और सरकारी लग्जरी गाड़ी को छोड़कर साइकिल से कोर्ट पहुंचे। इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में जिला न्यायाधीश राजीव रंजन कुमार को अपने सरकारी आवास से सिविल कोर्ट की ओर साइकिल चलाते हुए देखा जा सकता है। हालांकि, इस सफर में वह अकेले नहीं थे। उनके ठीक पीछे उनकी सुरक्षा के लिए तैनात बॉडीगार्ड अपनी वर्दी में कंधों पर राइफल टांगे हुए साइकिल चलाते हुए चल रहे थे। जिला जज के साथ फैमिली कोर्ट के जज अरुण कुमार और उनके पेशकार आत्मानंद राय ने भी इस मुहिम का हिस्सा बनें और साइकिल से ही दफ्तर पहुंचे।
दरअसल,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देश के नागरिकों से पेट्रोल और डीज़ल की खपत कम करने का आग्रह किया था और सुझाव दिया था कि जहां भी संभव हो, लोग सार्वजनिक परिवहन या साइकिल का इस्तेमाल करने का प्रयास करें। इस अपील को गंभीरता से लेते हुए औरंगाबाद के जिला जज ने अपनी आलीशान सरकारी कार को गैराज में खड़ा कर दिया और साइकिल से कोर्ट पहुंचे। कोर्ट परिसर में उनके पहुंचने पर, वहां मौजूद वकीलों और आम जनता ने जज की सादगी की तारीफ की।
जिला न्यायाधीश ने अपने सरकारी आवास से सिविल कोर्ट तक की लगभग 500 मीटर की दूरी पूरी तरह से साइकिल से तय की। जैसे ही उन्होंने कोर्ट परिसर के मुख्य द्वार से प्रवेश किया, वहां मौजूद वकीलों, मुवक्किलों और कर्मचारियों की नजरें तुरंत उन पर टिक गईं, क्योंकि आमतौर पर सिक्योरिटी टीम के साथ कोर्ट पहुंचने वाले जज इस बार साइकिल की घंटी बजाते हुए पहुंचे थे।
सिविल कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों ने जज इस पहल की सराहना की है। सीनियर वकीलों का कहना था कि एक वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी द्वारा की गई ऐसी पहल समाज के लिए एक महत्वपूर्ण सबक का काम करती है। आम लोगों को ऐसी पहल से प्रेरणा मिलती है।