कुछ समय पहले ही दिल्ली सरकार ने पुराने डीज़ल-पेट्रोल वाहनों के रजिस्ट्रेशन को जनवरी से रद्द करने का फैसला लिया था। अब दिल्ली सरकार ने यह प्रोसेस शुरू कर दी है।
दिल्ली सरकार ने कुछ समय पहले ही पुराने डीज़ल-पेट्रोल वाहनों के रजिस्ट्रेशन को रद्द करने का आदेश दिया दिया था। इस आदेश को 1 जनवरी 2022 से लागू करने के लिए दिल्ली सरकार ने नोटिस जारी किया था। ऐसे में अगर आप दिल्ली के निवासी है और आपके पास ऐसे पुराने डीज़ल-पेट्रोल वाहन हैं, तो अब आप इन्हें दिल्ली की सड़क पर नहीं चला पाएंगे। और अगर फिर भी कोई ऐसा करता है, तो उसे गैर-कानूनी माना जाएगा और उसके खिलाफ पेनल्टी या सज़ा का भी प्रावधान किया जाएगा।
आइए 10 पॉइंट्स में इस पूरे फैसले और इससे जुड़ी डिटेल्स को समझे।
1. दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने जानकारी देते हुए बताया की साल की शुरुआत से अब तक 10 साल से पुराने 1 लाख से भी ज़्यादा डीज़ल वाहनों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा चुका है।
2. 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों का भी रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा रहा है।
3. कैलाश गहलोत ने जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली में पर्यावरण का ध्यान रखने के लिए स्पेशल बसें चलाई जा रही हैं। इससे पब्लिक ट्रांसपोर्ट वाहन अपनी एक-तिहाई कैपेसिटी पर ही चल रहे हैं।
4. कैलाश गहलोत के अनुसार कोरोना महामारी के कारण इस समय दिल्ली में 50 सीट वाले पब्लिक ट्रांसपोर्ट वाहनों में लगभग 35 लोग ही सफर करते हैं।
5. कैलाश गहलोत के अनुसार दिल्ली सरकार ने अब तक पर्यावरण के लिए 550 स्पेशल बसों का परमिट री-न्यू किया है और आने वाले दिनों में इनकी संख्या बढ़ेगी।
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6. पहले दिल्ली सरकार 10 साल से पुराने डीज़ल वाहनों और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों को NOC जारी नहीं करने वाली थी। पर अब ऐसे वाहनों को NOC जारी की जाएगी।
7. दिल्ली सरकार उन सभी 10 साल पुराने डीज़ल वाहनों, जिनका रजिस्ट्रेशन खत्म कर दिया जाएगा, उन्हें एक NOC जारी करेगी। इससे उन पुराने डीज़ल वाहनों को दिल्ली के अलावा दूसरी जगहों पर फिर से रजिस्टर्ड किया जा सकेगा। हालांकि ऐसे डीज़ल वाहन जो 15 साल से ज़्यादा पुराने हैं, उन्हें NOC नहीं दी जाएगी।
8. कैलाश गहलोत ने जानकारी देते हुए बताया कि NOC के लिए सिर्फ ट्रांसपोर्ट विभाग की वेबसाइट के माध्यम से ही अप्लाई किया जा सकेगा।
9. पुराने वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने का भी ऑप्शन दिया जाएगा।
10. पुराने वाहनों को इलेक्ट्रिक किट की मदद से कन्वर्ट करने की प्रोसेस वाहन के मालिक और कंपनी के बीच ही रहेगी। इसमें सरकार या परिवहन विभाग की कोई ज़िम्मेदारी नहीं रहेगी।
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