दूसरा विकल्प एक इलेक्ट्रिक किट के साथ अपनी पुरानी कार को रेट्रो-फिट करना है। वहीं तीसरे विकल्प के तौर पर वाहन मालिक अपने वाहन को अधिकृत स्क्रैपेज सुविधा में भेज सकते हैं।
देश में प्रदुषण के स्तर को कम करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें पुराने वाहनों को स्क्रैप करना एक बड़ा कदम है। हाल ही में सामनें आई नई रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में लगभग 13.4 मिलियन व्हीकल रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से 42% 'अमान्य' यानी सड़क पर चलने योग्य नहीं हैं, क्योंकि ये या तो 10 वर्ष से अधिक पुराने हैं, या पेट्रोल इंजन के मामले में 15 वर्ष से अधिक पुराने हैं। कुल मिलाकर राजधानी में 30 लाख पेट्रोल से चलने वाले वाहन हैं, जो सड़क पर चलने योग्य नहीं हैं।
ये आंकड़े दिल्ली के परिवहन विभाग द्वारा किए गए एक विश्लेषण से सामने आए। परिवहन विभाग ने पहले एक लाख से अधिक वाहनों का पंजीकरण रद्द कर दिया था, क्योंकि ये पेट्रोल और डीजल वाहनों के लिए निर्धारित आयु सीमा से अधिक थे। जिन्हें 'End of Life' वाहन भी कहा जाता है, ऐसे वाहनों को शहर में चलाने की अनुमति के साथ-साथ सार्वजनिक स्थानों पर पार्क करने की भी अनुमति नहीं है।
दूसरे राज्य में वाहन बेचना बेहतर विकल्प
फिलहाल जिन मालिकों के पेट्रोल और डीजल वाहनों की आयु समाप्त हो चुकी है, ऐसे वाहन मालिकों के पास कई विकल्प उपलब्ध हैं। शायद सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला विकल्प राज्य परिवहन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना और दूसरे राज्य में खरीदार को वाहन बेचना है। यह विकल्प उन लोगों के लिए भी खुला है जिनके पास पुराने डीजल वाहन हैं।
इसके अलावा दूसरा विकल्प एक इलेक्ट्रिक किट के साथ अपनी पुरानी कार को रेट्रो-फिट करना है। वहीं तीसरे विकल्प के तौर पर वाहन मालिक अपने वाहन को अधिकृत स्क्रैपेज सुविधा में भेज सकते हैं। जिससे उन्हें नया वाहन खरीदने पर छूट का विकल्प प्रदान किया जा सकता है।