अयोध्या

अयोध्या में भाजपा की बड़ी नियुक्ति पर बवाल, आपराधिक छवि वाले नेता को जिम्मेदारी

Ayodhya BJP Appointment Row: अयोध्या में भाजपा की संगठनात्मक नियुक्ति पर विवाद गहराया, शिवेंद्र सिंह को महानगर महामंत्री बनाए जाने पर आपराधिक मामलों के चलते पार्टी और विपक्ष दोनों ने सवाल खड़े किए।

3 min read
Mar 27, 2026
अयोध्या में भाजपा की नियुक्ति पर विवाद: शिवेंद्र सिंह को महानगर महामंत्री बनाए जाने से उठे सवाल (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

Ayodhya BJP Appointment: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक संगठनात्मक फैसले ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। पार्टी द्वारा शिवेंद्र सिंह को महानगर महामंत्री नियुक्त किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि शिवेंद्र सिंह के खिलाफ करीब 18 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिसके चलते पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह इस फैसले को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार शिवेंद्र सिंह का नाम पहले भी कई बार आपराधिक मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। बताया जा रहा है कि वे पूर्व में कई बार जेल भी जा चुके हैं। विशेष रूप से योगी आदित्यनाथ सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान उनके खिलाफ कई गंभीर मुकदमे दर्ज किए गए थे। ऐसे में उनकी नियुक्ति ने संगठन के भीतर असहज स्थिति पैदा कर दी है।

ये भी पढ़ें

Rain alert : यूपी में बारिश को लेकर अलर्ट: सीएम योगी ने फसल नुकसान का तत्काल आकलन और मुआवजा देने के दिए निर्देश

भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच इस फैसले को लेकर असंतोष की चर्चा है। कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी में लंबे समय से काम कर रहे समर्पित कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर ऐसे व्यक्ति को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना संगठनात्मक मूल्यों के विपरीत है। उनका मानना है कि इससे पार्टी की छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, खासकर उस क्षेत्र में जो धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है।

अयोध्या, जिसे भगवान श्रीराम की नगरी के रूप में जाना जाता है, देशभर में आस्था और मर्यादा का प्रतीक है। ऐसे में यहां किसी भी राजनीतिक नियुक्ति का प्रभाव केवल संगठन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका व्यापक सामाजिक और राजनीतिक असर भी पड़ता है। यही कारण है कि इस नियुक्ति को लेकर जनमानस में भी चर्चा का माहौल बना हुआ है।

विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया है और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा ‘स्वच्छ छवि’ की बात करती है, लेकिन व्यवहार में ऐसे निर्णय उसके दावों पर सवाल खड़े करते हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि आरोप सही हैं, तो पार्टी को इस नियुक्ति पर पुनर्विचार करना चाहिए।

हालांकि, इस पूरे मामले पर अब तक भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। न ही शिवेंद्र सिंह ने इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया दी है। इससे स्थिति और अधिक अस्पष्ट बनी हुई है और अटकलों का दौर जारी है। सूत्रों  का कहना है कि ऐसे मामलों में पार्टी नेतृत्व को समय रहते स्पष्टता लानी चाहिए। यदि आरोप निराधार हैं, तो उन्हें तथ्यों के साथ खारिज किया जाना चाहिए, और यदि इनमें सच्चाई है, तो संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने के लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए।

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि इस विवाद का असर आगामी राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी रणनीतियों पर पड़ सकता है। अयोध्या जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में पार्टी की छवि को बनाए रखना भाजपा के लिए अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यहां की राजनीतिक और धार्मिक संवेदनशीलता देशभर में संदेश देती है।

कुल मिलाकर अयोध्या में शिवेंद्र सिंह की नियुक्ति ने भाजपा के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इस विवाद को किस तरह संभालती है और क्या वह संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने में सफल होती है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

ये भी पढ़ें

PM-Ajay Yojana: यूपी में SC छात्रों के लिए बड़ा फैसला: 6 आधुनिक हॉस्टल बनेंगे, ₹6.15 करोड़ जारी

Also Read
View All

अगली खबर