अयोध्या

राम मंदिर दान मामले में बड़ा खुलासा, अनिल मिश्रा की सिफारिश से रखे गए थे सवा सौ से अधिक कर्मचारी

Ayodhya Ram Mandir Scam : अयोध्या राम मंदिर दानपात्र हेराफेरी मामले में SIT की जांच तेज। ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा की भूमिका और करीबियों की नियुक्तियों समेत संपत्तियों की जांच के घेरे में आने से हड़कंप।
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Ram Mandir Donation Scam
Ram Mandir Donation Scam : श्री राम मंदिर में 100 से 125 कर्मचारी अनिल मिश्रा की सिफारिश पर रखे गए थे, PC- Patrika

अयोध्या के दानपात्र से कथित धनराशि हेराफेरी मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं। विशेष जांच दल (SIT) की पड़ताल में अब ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा की भूमिका भी जांच के दायरे में आती दिख रही है। सूत्रों के अनुसार, मंदिर प्रबंधन में नियुक्त किए गए कर्मचारियों में सबसे अधिक भर्ती अनिल मिश्रा की सिफारिश पर हुई थी।

जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि मंदिर प्रबंधन में नियुक्त किए गए करीब सवा सौ से अधिक कर्मचारी अनिल मिश्रा के परिचितों, रिश्तेदारों या करीबी लोगों में से थे। बताया जा रहा है कि चंपत राय और गोपाल राव के प्रभाव से नियुक्त कर्मचारियों की संख्या इसके मुकाबले लगभग आधी थी।

एसआईटी को मिले शुरुआती इनपुट के मुताबिक, मंदिर प्रशासन में नियुक्तियों को लेकर अनिल मिश्रा का हस्तक्षेप काफी व्यापक था और कई महत्वपूर्ण फैसलों में उनकी भूमिका प्रभावशाली मानी जाती थी।

गिरफ्तार आरोपियों के तार भी जुड़े

दानपात्र प्रकरण में अब तक जिन लोगों की गिरफ्तारी हुई है, उनमें टिन्नू यादव को चंपत राय का करीबी बताया जा रहा है, जबकि सुभाष श्रीवास्तव एक सेवानिवृत्त बैंककर्मी हैं। इसके अलावा अन्य छह आरोपी एक निजी कंपनी के माध्यम से बैंक की ओर से ठेके पर नियुक्त किए गए थे। सूत्रों का कहना है कि इन कर्मचारियों की नियुक्तियों में भी ट्रस्ट से जुड़े प्रभावशाली लोगों की सिफारिश अहम रही थी।

रिश्तेदारों की भूमिका भी जांच के घेरे में

जांच एजेंसियों के रडार पर अनुकल्प और लवकुश मिश्रा भी हैं। सूत्रों के मुताबिक दोनों का संबंध अनिल मिश्रा के परिवार से बताया जा रहा है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि नियुक्तियों की प्रक्रिया में किन-किन लोगों को प्राथमिकता दी गई और क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।

कर्मचारियों को हटाने के प्रस्ताव का हुआ था विरोध

सूत्रों के अनुसार, जब बैंक के एक अधिकारी ने संभावित गड़बड़ियों की आशंका जताते हुए गणनाकर्मियों को हटाने का प्रस्ताव रखा था, तब ट्रस्ट से जुड़े कई प्रभावशाली लोगों ने इसका विरोध किया था।

बताया जा रहा है कि चंपत राय, गोपाल राव और टिन्नू यादव ने कर्मचारियों के पक्ष में पैरवी की थी, लेकिन सबसे अधिक दबाव अनिल मिश्रा की ओर से बनाया गया। उन्होंने कथित तौर पर किसी भी कर्मचारी को हटाने का विरोध किया और अंततः कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि उस समय कर्मचारियों को बचाने के पीछे क्या वजह थी।

कमीशन और संपत्तियों की भी जांच

एसआईटी अनिल मिश्रा पर लगे कमीशनखोरी के आरोपों की भी जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान उनकी कई संपत्तियों की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियां यह आकलन कर रही हैं कि ट्रस्ट से जुड़ने के बाद उनकी चल-अचल संपत्तियों में कितनी वृद्धि हुई और क्या यह वृद्धि उनकी ज्ञात आय के अनुरूप है।

सूत्रों का दावा है कि संपत्तियों में कई गुना बढ़ोतरी के संकेत मिले हैं। हालांकि इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष एसआईटी की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएंगे।

रिपोर्ट में खुल सकती हैं कई परतें

जांच से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में दानपात्र प्रकरण, नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं, कर्मचारियों के चयन और आर्थिक लेन-देन से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई का रास्ता तय होगा।

Updated on:
01 Jul 2026 10:18 am
Published on:
01 Jul 2026 09:09 am
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