
Ram Mandir Donation Case: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को अब अपना पहला चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर यानी सीईओ मिलने वाला है। मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए ट्रस्ट ने इस पद की भर्ती प्रक्रिया तेज कर दी है। देशभर से इस पद के लिए 5300 से ज्यादा आवेदन आए थे। उनमें से सिर्फ 18 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए चुना गया है।
राम मंदिर के पहले CEO को चुनने के लिए तीन सदस्यों का एक पैनल इंटरव्यू करेगा। अयोध्या से मीडिया से बात करते हुए राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य दिनेन्द्र दास ने कहा कि सदस्य जो भी फैसला लेंगे, हमें उसे मानना होगा। सदस्य जो भी फैसला लेंगे, वह सही होगा।
आज यानी 11 अगस्त से इन 18 उम्मीदवारों के साक्षात्कार शुरू हो गए हैं। चार दिन तक चलने वाली इस प्रक्रिया में पहले दिन दो नाम सामने आ चुके हैं। पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय और अयोध्या के पूर्व जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा ने इंटरव्यू दे दिया है। राजेश पांडेय को एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में जाना जाता है। योगेश्वर राम मिश्रा पहले अयोध्या में डीएम रह चुके हैं, इसलिए उन्हें स्थानीय हालात की अच्छी समझ है। बाकी 16 उम्मीदवारों के नाम अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
इंटरव्यू तीन सदस्यीय समिति ले रही है। इसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, डॉ. सुरेश हावड़े और सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी शामिल हैं। हर उम्मीदवार से करीब एक से दो घंटे तक बातचीत हो रही है। समिति सिर्फ प्रशासनिक अनुभव ही नहीं पूछ रही। श्रीराम के प्रति आस्था, मंदिर के काम की समझ, परिवार की पृष्ठभूमि और बड़े स्तर पर प्रबंधन संभालने की क्षमता भी जांच रही है।
18 उम्मीदवारों में से समिति तीन नाम चुनेगी। ये तीन नाम श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपे जाएंगे। उसके बाद ट्रस्ट के पदाधिकारी खुद इन तीनों से बात करेंगे और एक नाम पर अंतिम फैसला लेंगे। उम्मीद है कि 2 सितंबर को सीईओ के नाम का ऐलान हो जाएगा।
मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रशासनिक व्यवस्था, सुविधाएं और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल बैठाना अब आसान नहीं रह गया है। इसलिए सीईओ का पद काफी अहम माना जा रहा है। जो व्यक्ति चुना जाएगा, उसे मंदिर के संचालन की बड़ी जिम्मेदारी संभालनी होगी।
अभी रेस में पूर्व आईपीएस राजेश पांडेय और पूर्व डीएम योगेश्वर राम मिश्रा का नाम सबसे आगे दिख रहा है, लेकिन अंतिम फैसला ट्रस्ट के हाथ में है। चार दिन के इंटरव्यू के बाद ही साफ हो पाएगा कि राम मंदिर का पहला सीईओ कौन बनेगा।