11 अगस्त 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Ram Mandir: चंपत राय फिर संभालेंगे जिम्मेदारी? महंत दिनेंद्र दास ने बताया किसके हाथ में है फैसला

Champat Rai Resignation: चंपत राय की संभावित वापसी की चर्चाओं के बीच राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि फैसला प्रशासन के स्तर पर होगा और ट्रस्ट के सदस्य उसे स्वीकार करेंगे। जानिए चंपत राय की भूमिका और पूरे मामले का अपडेट।
2 min read
Google source verification
Champat Rai News Champat Rai Return Champat Rai Ram Mandir

निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास (photo- x @ani)

Champat Rai Ram Mandir:राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की दोबारा भूमिका में वापसी को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेंद्र दास महाराज का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि चंपत राय की वापसी से जुड़ा फैसला प्रशासन और संबंधित स्तर पर लिया जाना है। जो भी निर्णय होगा, ट्रस्ट के सदस्य उसे स्वीकार करेंगे। यह बयान ऐसे समय आया है जब राम मंदिर ट्रस्ट में पिछले कुछ समय में बड़े प्रशासनिक बदलाव हुए हैं और चढ़ावे से जुड़े कथित गड़बड़ी के मामले की जांच भी जारी है।

चंपत राय की वापसी पर क्या बोले महंत दिनेंद्र दास?

चंपत राय के फिर से अपनी जिम्मेदारी संभालने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए महंत दिनेंद्र दास महाराज ने कहा कि यह विषय प्रशासन के स्तर पर तय होगा। उनके मुताबिक, प्रशासन जो भी फैसला लेगा, ट्रस्ट के सदस्य उसे स्वीकार करने के लिए तैयार हैं।उनके बयान का संकेत साफ है कि फिलहाल चंपत राय की वापसी को लेकर अंतिम फैसला उनकी व्यक्तिगत इच्छा या किसी एक सदस्य के स्तर पर नहीं, बल्कि संबंधित प्रशासनिक और ट्रस्ट प्रक्रिया के तहत होना है।

पहले क्या हुआ था चंपत राय के साथ?

चंपत राय श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव के तौर पर मंदिर निर्माण और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं में लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका में रहे हैं। राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं की जांच के बीच उन्होंने जून 2026 में महासचिव पद से इस्तीफा दिया था। ट्रस्ट ने शुरुआत में कहा था कि इस्तीफे पर अगली बैठक में फैसला लिया जाएगा। बाद में जुलाई की बैठक में ट्रस्ट ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने भी स्पष्ट किया था कि इस्तीफा स्वीकार होने के बाद चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ट्रस्ट के सदस्य नहीं रहे।

क्या चंपत राय पर कोई दोष साबित हुआ?

यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य समझना जरूरी है। जुलाई में महंत दिनेंद्र दास ने कहा था कि ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय के खिलाफ कोई गलत काम सामने नहीं आया था। उन्होंने बताया था कि ट्रस्ट के कुछ सदस्यों की राय उन्हें बनाए रखने की थी, लेकिन उनके लिखित इस्तीफे के बाद उसे स्वीकार किया गया। इसलिए चंपत राय की भूमिका को लेकर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच और आधिकारिक प्रक्रिया के परिणाम का इंतजार करना जरूरी है।

चढ़ावे की जांच के बीच हुआ था बड़ा प्रशासनिक बदलाव

राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े मामले के सामने आने के बाद ट्रस्ट ने अपने प्रशासनिक ढांचे में कई बदलाव किए। चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार करने के साथ कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी दी गई और मंदिर के प्रशासनिक कामकाज के लिए CEO पद बनाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई। इसी प्रक्रिया के तहत अब CEO की नियुक्ति भी अहम हो गई है। यानी राम मंदिर ट्रस्ट में प्रशासनिक जिम्मेदारियों का ढांचा पहले की तुलना में बदल रहा है।