
राम मंदिर चढ़ावा मामले में जांच का दायरा बढ़ा (photo- x@ShriRamTeerth)
Ram Mandir Donation Investigation: राम मंदिर में चढ़ावे और उसकी गणना से जुड़े कथित गड़बड़ी के मामले की जांच अब पहले के मुकाबले काफी व्यापक हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद गठित SIT ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए अब राम मंदिर ट्रस्ट के गठन के समय से जुड़े रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं। पहले जांच मुख्य रूप से हाल के दो वित्तीय वर्षों के दस्तावेजों तक सीमित थी, लेकिन अब 2020-21 से 2023-24 तक के रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में हैं।
जांच टीम पुराने और मौजूदा कर्मचारियों से भी पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का फोकस इस बात पर है कि चढ़ावे की गणना, रिकॉर्ड तैयार करने और रकम व धातुओं को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया में कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई।
पहले प्रदेश सरकार की ओर से गठित SIT ने मुख्य रूप से वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 से जुड़े लेखा-जोखा की पड़ताल की थी। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद जांच को पीछे की अवधि तक ले जाया गया है। नई जांच में 2020-21, 2021-22, 2022-23 और 2023-24 से जुड़े रिकॉर्ड भी देखे जा रहे हैं। यानी अब ट्रस्ट के गठन के बाद से मंदिर की चढ़ावा व्यवस्था से जुड़े दस्तावेजों की पूरी कड़ी को समझने की कोशिश हो रही है।
जांच की शुरुआत में मंदिर में चढ़ावे की गणना से जुड़े करीब आधा दर्जन कर्मचारियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। अब जांच टीम ने ट्रस्ट के गठन के बाद से मंदिर में काम कर चुके कर्मचारियों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की है। क्षेत्राधिकारी कार्यालय में अलग-अलग कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों की ओर से एक ही घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग सवाल पूछे जा रहे हैं, ताकि बयानों में किसी तरह का विरोधाभास सामने आए तो उसकी भी पड़ताल की जा सके।
SIT जांच के बीच राम मंदिर में चढ़ावे की गणना की व्यवस्था को भी नए सिरे से व्यवस्थित किया जा रहा है। बैंक प्रबंधन ने SOP के तहत गणना प्रक्रिया में बदलाव किया है। बताया गया है कि इस बार गणना के काम में सेना से सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारियों को लगाया गया है। SBI की अलग-अलग शाखाओं से 10 नियमित बैंक कर्मचारियों को गणना के लिए भेजा गया है। गणना के लिए कुल 12 कर्मचारियों की जरूरत बताई गई है। फिलहाल 10 कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी गई है, जबकि पूरे काम की निगरानी के लिए क्लास-2 स्तर के एक अधिकारी को सुपरविजन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
नई व्यवस्था के साथ बैंक प्रबंधन ने मंदिर में तैनात सिक्योरिटी सर्विस एजेंसी का अनुबंध खत्म करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। एजेंसी के ज्यादातर कर्मचारियों को मंदिर से हटा दिया गया है। हालांकि, तीन कर्मचारियों को फिलहाल काम पर रखा गया है। उनकी जिम्मेदारी दानपात्रों से निकाले गए चढ़ावे को निर्धारित पेटियों में गणना स्थल तक पहुंचाने और गणना पूरी होने के बाद उसे सुरक्षित बैंक तक पहुंचाने की बताई गई है।
दूसरी ओर, ट्रस्ट की ओर से बैंक में जमा धनराशि और धातुओं से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की गई है। अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने लॉकरों से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड की प्रक्रिया पूरी की है। सभी लॉकरों की वीडियोग्राफी और जरूरी दस्तावेज तैयार किए जाने के बाद ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने महत्वपूर्ण कागजात पर हस्ताक्षर किए और लॉकर की चाबियां नवनियुक्त अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन को सौंप दीं। बताया गया है कि कुछ दिन पहले SBI के महाप्रबंधक ने भी अयोध्या पहुंचकर चढ़ावे और बैंक से जुड़ी व्यवस्थाओं का जायजा लिया था।
इसी बीच राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया भी आगे बढ़ गई है। सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय चयन समिति ने CEO पद के लिए आए करीब 5,200 आवेदनों की स्क्रीनिंग पूरी कर ली है। अब चयनित उम्मीदवारों के इंटरव्यू 11 और 12 अगस्त को अयोध्या में आयोजित किए जाएंगे। साक्षात्कार के बाद समिति तीन नामों का पैनल तैयार कर ट्रस्ट को सौंपेगी। इसके बाद प्रस्तावित 2 सितंबर की ट्रस्ट बैठक में इन नामों पर चर्चा होगी। अंतिम नियुक्ति ट्रस्टियों की मंजूरी के बाद की जाएगी।
इस तरह राम मंदिर चढ़ावा मामले में जांच का दायरा बढ़ने के साथ-साथ मंदिर की आंतरिक व्यवस्थाओं में भी बदलाव किए जा रहे हैं। अब जांच टीम की नजर सिर्फ हालिया रिकॉर्ड पर नहीं, बल्कि ट्रस्ट के गठन के बाद से पूरी व्यवस्था की कड़ी पर है। आगे की जांच में पुराने रिकॉर्ड और कर्मचारियों के बयानों से क्या सामने आता है, इस पर सबकी नजर रहेगी।
Updated on:
10 Aug 2026 07:28 pm
Published on:
10 Aug 2026 07:28 pm
