
Ayodhya Ram Mandir Donation Row: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) की बैठक में चंपत राय का इस्तीफा मंजूर (Champat Rai Resignation Accepted) कर लिया गया है। ट्रस्ट के सूत्रों ने यह जानकारी दी है। चढ़ावा चोरी (Ram Mandir Donation Theft) का मामला सामने आने पर चंपत राय (Champat Rai) ने राम मंदिर ट्रस्ट (Ram Mandir Trust) के महासचिव पद से इस्तीफा दिया था। अब उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद के नगीना के निवासी हैं। वह विश्व हिंदू परिषद में अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं। आपातकाल के दौरान 1975 में चंपत राय जेल जा चुके हैं। उन्होंने 18 महीने जेल में काटे थे। उस दौरान चंपत राय धामपुर के RSM कॉलेज में प्रोफेसर थे। बता दें कि चंपत राय और अनिल मिश्रा ने चढ़ावा चोरी की घटना सामने आने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के पद से इस्तीफा दिया था।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) की बैठक में वर्तमान महासचिव चंपत राय के इस्तीफे को आधिकारिक रूप से मंजूर कर लिया गया है। चंपत राय की विदाई के साथ ही ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। बजरंग लाल बागड़ा (Bajrang Lal Bagda) को राम मंदिर ट्रस्ट का नया महासचिव (General Secretary) चुन लिया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट के नवनियुक्त महासचिव बजरंग लाल बागड़ा इस समय अयोध्या राम मंदिर परिसर क्षेत्र में ही मौजूद हैं। हालांकि, वे रणनीतिक और प्रशासनिक कारणों से सीधे तौर पर ट्रस्ट की इस बैठक में भाग नहीं ले रहे हैं। औपचारिक प्रक्रियाओं के बाद वे जल्द ही अपना नया कार्यभार संभालेंगे।
बैठक से पहले सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल ने लेटर जारी करके पहली बार चढ़ावा चोरी मामले पर बयान दिया। नृत्य गोपाल ने लेटर जारी करके अपनी बात रखी। ट्रस्ट के अध्यक्ष ने कहा- चोरी से मैं आहत हूं। जिसने भी यह पाप किया है, उसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
पत्र में नृत्य गोपाल ने लिखा है कि उन्हें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पूरा भरोसा है कि वे इस मामले में दोषियों को बख्शेंगे नहीं और उचित कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। पत्र के अंत में महंत ने साफ शब्दों में कहा कि यह मामला करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़ा है, इसलिए भगवान श्रीराम के नाम पर किसी भी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए।