
महंत सीताराम दास फोटो सोर्स IANS
Ram Mandir Donation Row: अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बीच रविवार को आयोजित संत समाज की बैठक में शामिल होने पहुंचे महंत सीताराम दास ने ट्रस्ट महासचिव चंपत राय का खुलकर बचाव किया। उन्होंने कहा कि मामले की एसआईटी जांच जारी है। जांच पूरी होने तक किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं है। संत समाज का मानना है कि सत्य सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी।
राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में भाग लेने पहुंचे महंत सीताराम दास ने कहा कि हाल के दिनों में अयोध्या की महिमा, गरिमा और राम मंदिर की प्रतिष्ठा पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए संत समाज ने बैठक आयोजित कर अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि जिस मामले को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है। उसकी एसआईटी जांच स्वयं चंपत राय की मांग पर शुरू हुई है। ऐसे में जो व्यक्ति स्वयं निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा हो, उसके बारे में बिना किसी ठोस प्रमाण के आरोप लगाना उचित नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां अपना कार्य कर रही हैं। और यदि कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है। तो उसके विरुद्ध निश्चित रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन जब तक किसी पर लगे आरोप सिद्ध नहीं हो जाते, तब तक उसकी छवि धूमिल करना, उसकी निष्ठा और सेवा भावना पर सवाल उठाना न्यायसंगत नहीं है।
महंत सीताराम दास ने कहा कि चंपत राय पिछले पांच दशकों से रामजन्मभूमि आंदोलन और सनातन धर्म की सेवा में समर्पित रहे हैं। उनकी तपस्या, भक्ति, निष्ठा और संगठन के प्रति समर्पण किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अब तक की जांच में चंपत राय की किसी भी प्रकार की वित्तीय संलिप्तता सामने नहीं आई है। इसलिए संत समाज उनके साथ मजबूती से खड़ा है।
उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन और आय-व्यय का दायित्व जिन लोगों के पास रहा है। उनसे भी जवाब लिया जाना चाहिए। उन्होंने गोविंद गिरी और गोपाल राव का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके कार्यों और जिम्मेदारियों पर भी निष्पक्ष तरीके से जांच होनी चाहिए। किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाना उचित नहीं है।
महंत सीताराम दास ने कहा कि आज देश को जो भव्य और दिव्य राम मंदिर देखने को मिला है। उसमें चंपत राय के नेतृत्व और वर्षों की मेहनत का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने संत समाज और श्रद्धालुओं से अपील की कि एसआईटी जांच पूरी होने तक धैर्य बनाए रखें। किसी भी प्रकार की अफवाहों या भ्रामक प्रचार पर विश्वास न करें। और जांच पूरी होने दें। उन्होंने विश्वास जताया कि जांच के बाद "दूध का दूध और पानी का पानी" हो जाएगा। तथा जो भी दोषी होगा। उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
Updated on:
06 Jul 2026 01:11 pm
Published on:
06 Jul 2026 01:11 pm
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