अयोध्या

चंपत को गिरफ्तार करो… प्रधानमंत्री चुप्पी तोड़ो, कांग्रेस ने राम मंदिर दान विवाद पर बोला हमला

Ram Mandir Donation Dispute : अयोध्या राम मंदिर दान और चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और ट्रस्ट पर बड़ा हमला बोला है। जयराम रमेश और शक्तिसिंह गोहिल ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच और चंपत राय की गिरफ्तारी की मांग की है।
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Ram Mandir
Ram Mandir Donation Controversy : राम मंदिर दान विवाद पर बोले जयराम रमेश, PC- AI

अयोध्या : राम मंदिर दान और चढ़ावे में कथित गड़बड़ी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। कांग्रेस ने मांग की है कि ट्रस्ट को भंग किया जाए, कथित दोषियों को गिरफ्तार किया जाए और पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जाए। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मुद्दे पर चुप्पी तोड़ने और देश से माफी मांगने की मांग की है।

जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री पर साधा निशाना

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर निर्माण और उद्घाटन का श्रेय लेने में सबसे आगे रहे, लेकिन अब जब मंदिर के चढ़ावे और दान में कथित गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं तो वे जिम्मेदारी लेने से बच रहे हैं।

जयराम रमेश ने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में सरकार को जवाब देना चाहिए। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो, असली दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और श्रद्धालुओं के विश्वास को बहाल किया जाए।

शक्तिसिंह गोहिल ने की सुप्रीम कोर्ट निगरानी में जांच की मांग

दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने भी राम मंदिर दान विवाद को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान ट्रस्ट को भंग कर नया ट्रस्ट गठित किया जाना चाहिए।

गोहिल ने सुझाव दिया कि नए ट्रस्ट में चारों शंकराचार्यों के प्रतिनिधि, सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, निर्मोही अखाड़ा के प्रतिनिधि और प्रतिष्ठित संतों को शामिल किया जाए ताकि मंदिर की व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बन सके।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने संत समाज की बजाय चंपत राय जैसे लोगों को ट्रस्ट में अहम जिम्मेदारी देकर गलती की है और अब उन्हें इसकी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए देश से माफी मांगनी चाहिए।

'हर दिन 10 लाख रुपये के गबन का संदेह'

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस ने दावा किया कि कथित विवाद सामने आने से पहले राम मंदिर में प्रतिदिन 16 से 18 लाख रुपये का चढ़ावा दर्ज किया जा रहा था। लेकिन मामला सार्वजनिक होने के बाद यह राशि बढ़कर 24 से 26 लाख रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गई।

कांग्रेस का आरोप है कि दोनों आंकड़ों के बीच का अंतर यह संकेत देता है कि पहले प्रतिदिन लगभग 10 लाख रुपये तक की राशि का हिसाब दर्ज नहीं हो रहा था। हालांकि पार्टी ने इस दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि देश और विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान राम के मंदिर निर्माण और सेवा के लिए दान दिया है, इसलिए हर रुपये का हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए।

चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों का भी उठाया मुद्दा

कांग्रेस ने हाल ही में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जाने का भी जिक्र किया। पार्टी का कहना है कि इन इस्तीफों से यह स्पष्ट होता है कि दान और चढ़ावे से जुड़े आरोपों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

कांग्रेस का दावा है कि इस्तीफे स्वीकार किए जाने के बाद अब निष्पक्ष जांच की जरूरत और बढ़ गई है। पार्टी ने मांग की कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

ट्रस्ट ने क्या कहा?

वहीं, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पहले ही दान व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने की बात कह चुका है। ट्रस्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत नई जिम्मेदारियां तय की हैं और दान प्रबंधन प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति हेतु तीन सदस्यीय खोज समिति का गठन किया है।

ट्रस्ट का कहना है कि श्रद्धालुओं के विश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी और सभी व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा।

राजनीतिक रूप से भी अहम हुआ मुद्दा

राम मंदिर दान विवाद अब केवल प्रशासनिक या ट्रस्ट से जुड़ा मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। एक तरफ कांग्रेस इसे श्रद्धालुओं की आस्था और पारदर्शिता से जोड़कर सरकार को घेर रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा और ट्रस्ट पर लगे आरोपों की जांच और राजनीतिक प्रभाव को लेकर सियासी बहस लगातार तेज होती जा रही है।

Updated on:
08 Jul 2026 06:18 pm
Published on:
08 Jul 2026 06:18 pm
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