प्रयागराज में आयोजित संत सम्मेलन में राम मंदिर निर्माण पर बनी रणनीति
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
अयोध्या. श्रद्धालु अब जी भरकर रामलला के दर्शन कर सकेंगे। गर्भगृह में भले ही उन्हें रामलला को नमन करने का समय कम मिले, लेकिन वर्चुअल तरीके से वह मन भरकर अपने आराध्य को निहार सकेंगे। जन्मभूमि कैम्पस में थ्री डी तकनीक की ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि दर्शन के वक्त श्रद्धालुओं को अहसास भी नहीं होगा कि वह गर्भगृह में नहीं हैं। प्रयागराज में हुए संत सम्मेलन में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय ने बताया कि गर्भगृह में एक बार में सीमित संख्या में ही लोगों को प्रवेश दिया जा सकता है। ऐसे में लोगों को गर्भगृह में रुकने का कम समय भी कम ही मिलेगा। इसे देखते हुए श्रद्धालुओं के लिए थ्री डी तकनीक से इस तरह की व्यवस्था की जाएगी कि कैम्पस में कुछ खास जगहों पर वर्चुअल तरीके से माथा टेकने पर श्रद्धालुओं को सीधे गर्भगृह में मौजूद होने का एहसास होगा। कोरोना कम जरूर हुआ है, लेकिन अभी टला नहीं है। ट्रस्ट के पदाधिकारियों का मानना है कि थ्री डी तकनीक का इस्तेमाल बेहतर विकल्प है। इससे सामाजिक दूरी का नियम का पालन हो सकेगा वहीं, श्रद्धालु भी रामलला के दर्शन करेंगे।
प्रयागराज में आयोजित संत-सम्मेलन में चम्पत राय ने बताया कि राम मंदिर के लिए धन संग्रह अभियान मकर संक्रांति से शुरू होगा। अभियान की शुरुआत दिल्ली में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से आर्थिक सहयोग लेने के साथ की जाएगी। उन्होंने बताया कि आमजन से राम मंदिर का चंदा लिया जाएगा, ताकि उन्हें लगे कि यह उनका अपना मंदिर है। उनके सपनों का मंदिर है। उन्होंने बताया कि धन संग्रह अभियान के जरिये हिन्दुओं में सामाजिक समरसता भी बढ़ाई जाएगी। इसके लिए संघ और विहिप के कार्यकर्ताओं को कहा गया है कि वह दलितों और वंचितों की बस्तियों और उनके घरों पर अधिक फोकस करें।
रोजाना बैंक में जमा होगा चंदे का पैसा
चम्पत राय ने बताया कि धन संग्रह अभियान के तहत हर दिन इकट्ठा की गई धनराशि तीन बैंकों की 46 हजार ब्रांचों में जमा की जाएगी। जमा करते वक्त अकाउंट नंबर भरने में कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए पहले से ही प्रिंटेड पर्ची का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसमें बैंक खाता नम्बर की जगह किसी लोगो या प्रतीक चिन्ह को डाला जाएगा। संत सम्मेलन में चंपत राय के साथ ही मंदिर ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि और संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती समेत करीब 50 के करीब संत महात्मा मौजूद रहे।
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