Nand Kishore Gurjar Statement : राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के बयान पर यूपी की राजनीति गरमा गई है। भाजपा ने नृपेंद्र मिश्रा की बात का समर्थन करते हुए कहा कि मुलायम सिंह यादव के हाथ रामभक्तों के खून से रंगे हैं।
अयोध्या : राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा द्वारा 1992 में विवादित ढांचा पर दिए बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। नृपेंद्र मिश्रा ने तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व को उस समय की घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराया है। भाजपा नेताओं ने नृपेंद्र मिश्रा के बयान को सही ठहराया है और कारसेवकों पर गोली चलवाने का जिम्मेदार सपा को माना।
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री जयवीर सिंह ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'पूरी दुनिया जानती है कि मुख्य सचिव कोई भी हो, फैसला हमेशा मुख्यमंत्री का ही माना जाता है। तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह ने जो भी निर्णय लिया, उसका पालन तत्कालीन मुख्य सचिव नृपेंद्र मिश्र ने किया। यही वह बता रहे हैं। मतलब साफ है कि मुलायम सिंह यादव के आदेश पर ही कारसेवकों पर गोली चलाने का निर्णय लिया गया था।'
भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने IANS से बात करते हुए कहा, 'नृपेंद्र मिश्र की बात बिल्कुल सही है, जिसे कोई नकार नहीं सकता। पूरे प्रदेश का प्रशासनिक मुखिया मुख्यमंत्री होता है, जिसे कोई नकार नहीं सकता। लोकतंत्र में शासन प्रशासन को चलाने की शक्ति जनता ने मुख्यमंत्री को दी है। कल्याण सिंह भी मुख्यमंत्री रहे, जिन्होंने अपनी सरकार को जाने दिया, लेकिन एक भी रामभक्तों पर गोली नहीं चलने दी। ढांचा गिरा, जिसके बाद आज भव्य और दिव्य मंदिर है। यही कारण है कि जब वह निकलते थे, तो लोग उनकी पैर की मिट्टी को छूते थे।'
उन्होंने कहा, 'नृपेंद्र मिश्र ने जो कहा है कि कारसेवकों पर गोली चलाने का निर्णय मुलायम सिंह यादव की सरकार का था, वह सही है। उनके हाथ कारसेवकों के खून से रंगे हुए हैं, जिस बात को दोहराने की जरूरत नहीं है। किस तरह से निर्ममता के साथ कारसेवकों को मारा गया और सरयू नदी में उनके शरीर पर पत्थर बांध-बांधकर डाले गए थे। जो बयान नृपेंद्र मिश्र का आया है, वह बिल्कुल सही है। समाजवादी पार्टी के हाथ कारसेवकों के खून से रंगे हुए हैं, जिसको एक भी हिंदू नहीं भूलेगा।'
भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने भी मुलायम सिंह यादव सरकार के कामों की आलोचना करते हुए कहा, 'मुलायम सिंह यादव की सरकार ने कारसेवकों के साथ जो कुछ भी किया, उसे कोई भी सही नहीं ठहरा सकता। यह बेहद क्रूर था और सनातनियों पर एक बड़ा हमला था।'
इससे पहले पत्रकारों से बात करते हुए मिश्रा ने कहा था, 'इस तरह के फैसले मुख्य सचिव के स्तर पर नहीं लिए जाते। इस तरह के लगभग 90 प्रतिशत फैसले राजनीतिक प्रकृति के होते हैं, और लगभग 10 प्रतिशत फैसलों में गृह सचिव, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक की राय शामिल होती है।'
उन्होंने आगे कहा, 'मैंने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और कल्याण सिंह, दोनों के मुख्य सचिव के तौर पर काम किया है। आपको यह भी पता होगा कि जब कल्याण सिंह को रिपोर्ट सौंपी गई थी, जिसमें कहा गया था कि अयोध्या में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, तो उन्होंने लिखित आदेश दिया था कि इस पवित्र शहर में कोई गोलीबारी नहीं होगी।'
ये टिप्पणियां अयोध्या में हुई पिछली गोलीबारी के संदर्भ में आई हैं, जब 30 अक्टूबर और 2 नवंबर, 1990 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल के दौरान पुलिस ने कारसेवकों पर गोली चलवाई थी।