अयोध्या

PM मोदी के ‘मन की बात’ में अशोक सिंघल के जिक्र पर परमहंस आचार्य का बयान, बोले- अकेले चले थे सिंघल, जुड़ता गया कारवां

PM Narendra Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम में अशोक सिंघल की चर्चा किए जाने पर तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर परमहंस आचार्य ने प्रतिक्रिया दी है। परमहंस आचार्य ने कहा कि अकेले चले अशोक सिंघल के साथ धीरे-धीरे करोड़ों लोगों का कारवां जुड़ गया।
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Sep 27, 2026
pm news
पीएम नरेंद्र मोदी(फोटो-ANI)

PM Narendra Modi Mann Ki Baat: अयोध्या की प्रसिद्ध तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम 'मन की बात' के 138वें एपिसोड में अशोक सिंघल के स्मरण को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। प्रधानमंत्री मोदी ने अशोक सिंघल की 100वीं जयंती पर उन्हें याद करते हुए कहा कि, उन्होंने अपना पूरा जीवन संस्कृति, समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया था।पीएम मोदी ने राम जन्मभूमि आंदोलन को दिशा और ऊर्जा देने में भी अशोक सिंघल की भूमिका का जिक्र किया।

अकेले चले थे सिंघल, जुड़ता गया कारवां- परमहंस आचार्य

परमहंस आचार्य ने पीएम मोदी द्वारा अशोक सिंघल की चर्चा किए जाने पर कहा, "देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आक्रांताओं के द्वारा हमारी संस्कृति को विकृत किया गया था, भारतीय आस्था पर जो एक षड्यंत्र करके चक्रव्यूह रचा गया था, उसको संघ, VHP, भाजपा और रामभक्तों के अथक प्रयास से विफल किया गया। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में फिर से भारतीय संस्कृति के आदर्श प्रभु श्री रामलला के भव्य-दिव्य मंदिर की स्थापना हुई। अशोक सिंघल विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष थे। उनका नाम ही सिंघल था और सिंगल ही चल पड़े, काफिला जुड़ता गया। एक दिन ऐसा आया कि करोड़ों का कारवां बन गया।"

मन की बात में PM मोदी ने क्या कहा

मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि, "आज 27 सितंबर की ये तारीख एक विशेष कारण से और भी विशेष हो गई है। आज एक ऐसे महानुभाव की 100वीं जन्मजयंती है, जिन्होंने संस्कृति, समाज और राष्ट्र के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। मैं बात कर रहा हूं, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के पूर्व अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष स्वर्गीय अशोक सिंघल की। उन्होंने समाज के बीच रहकर एक सच्चे तपस्वी की तरह अपना पूरा जीवन बिताया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात का जिक्र किया कि अशोक सिंघल ने राम जन्मभूमि आंदोलन को जो सही दिशा और अभूतपूर्व ऊर्जा प्रदान की थी, उसी का परिणाम आज हम सबकी आंखों के सामने अयोध्या में एक भव्य और दिव्य मंदिर के रूप में मौजूद है।"

सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ किया संघर्ष

प्रधानमंत्री ने कहा, मेरा सौभाग्य रहा है कि मैंने न सिर्फ उनके उस जीवन को करीब से देखा, बल्कि मुझे उनके साथ इस मिशन से जुड़ने का भी अवसर मिला। जब मैं राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के अनुष्ठान में शामिल हो रहा था, तब भी मुझे बार-बार अशोक जी की याद आना बहुत स्वाभाविक था। अशोक जी के बारे में ऐसी कितनी ही बातें हैं, जिनकी उतनी चर्चा नहीं होती। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि अशोक सिंघल ने अपना संपूर्ण जीवन समाज और भारतीय संस्कृति की सेवा के लिए समर्पित कर दिया था। उन्होंने समाज के भीतर फैली हुई सामाजिक कुरीतियों, भेदभाव और विषमता के खिलाफ भी कड़ा संघर्ष किया और कई सार्थक प्रयास किए। उनके इसी त्याग, समर्पण और संघर्ष के बल पर ही राष्ट्र और समाज को एक नई दिशा मिली है।

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