राधाकृष्णन ने राम मंदिर आंदोलन से जुड़े अपने पारिवारिक संस्मरण साझा करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि जब विश्व हिंदू परिषद के नेता स्वर्गीय अशोक सिंहल ने रामशिला पूजा का आह्वान किया था, तब उनकी मां ने सिर पर ईंट उठाकर राम मंदिर निर्माण के लिए पूजा का नेतृत्व किया था। उन्होंने कहा कि उस समय मेरी मां कभी कल्पना नहीं कर सकती थीं कि सुदूर दक्षिण के रामेश्वरम से आने वाला उनका बेटा एक दिन भारत का उपराष्ट्रपति बनेगा और राम जन्मभूमि पर इस समारोह का हिस्सा बनने का गौरव प्राप्त करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ सदियों पुरानी आकांक्षाएं पूरी हुई हैं। उन्होंने सवाल किया कि अगर राम जन्मभूमि पर राम मंदिर नहीं बन सकता था, तो फिर कहां बनता?