
Ram Mandir Ayodhya: अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान चोरी का मामला सामने आने के बाद पुजारियों के लिए नया ड्रेस कोड लागू किए जाने के फैसले पर तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ड्रेस कोड को अच्छी पहल बताया, लेकिन कहा कि इसे पुजारियों पर थोपा नहीं जाना चाहिए। उनका कहना है कि ड्रेस कोड तय करने से पहले अर्चकों, पुजारियों और विद्वानों से राय और सहमति ली जानी चाहिए।
जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम लल्ला के मंदिर में पुजारियों के लिए ड्रेस कोड होना अच्छी बात है। उन्होंने सुझाव दिया कि सप्ताह के सातों दिनों के लिए सात अलग-अलग रंग निर्धारित किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह भगवान के वस्त्र समय-समय पर बदले जाते हैं, उसी तरह पुजारियों के लिए भी तय रंगों के अनुसार सातों दिन अलग-अलग रंग के वस्त्र रखे जा सकते हैं।
परमहंस आचार्य ने कहा कि ड्रेस कोड से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले मंदिर के अर्चकों और पुजारियों की राय लेना जरूरी है। उनके मुताबिक, इस विषय पर अन्य विद्वानों से भी सलाह और सहमति ली जानी चाहिए, ताकि व्यवस्था को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके। उन्होंने कहा कि ड्रेस कोड को पुजारियों पर थोपने के बजाय उनसे बातचीत के जरिए इसे लागू किया जाना चाहिए।
जगद्गुरु ने कहा कि अगर ड्रेस कोड लागू किया गया है तो मंदिर प्रशासन को पुजारियों के लिए कपड़ों की व्यवस्था भी करनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रशासन की ओर से पुजारियों को सातों दिनों के लिए निर्धारित सात रंगों के कपड़े उपलब्ध कराए जाएं। उनके मुताबिक, इससे ड्रेस कोड को लेकर पुजारियों के सामने किसी तरह की परेशानी नहीं आएगी और व्यवस्था भी आसानी से लागू की जा सकेगी।
इसी दौरान परमहंस आचार्य ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर चल रहे विवाद पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने सभी सांसदों से राष्ट्रगीत का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की भी एक सीमा होनी चाहिए और ऐसा नहीं होना चाहिए कि बहस के दौरान राष्ट्रवाद की लक्ष्मण रेखा पार हो जाए।
परमहंस आचार्य ने कहा कि उन्हें उस समय सभी सांसदों पर गर्व हुआ था, जब ‘वंदे मातरम’ बजने पर सभी लोग सम्मान में खड़े हुए थे। उन्होंने कहा कि ऐसा ही होना चाहिए और यह दिखना चाहिए कि राष्ट्रीय भावना सर्वोपरि है।
जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने राहुल गांधी समेत सभी नेताओं से देशहित को सर्वोपरि रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि नेताओं को जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाना चाहिए और राजनीति के दौरान राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देनी चाहिए।