
Ram Mandir Donation Theft Update: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित गबन से जुड़ा विवाद लगातार राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में समाजवादी पार्टी के नेता राजीव राय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह डकैती थी। यह बात साबित हो गई है कि ये खबरें दुखी करने वाली हैं। जो लोग सनातन का असली मतलब जानते हैं यह उन्हें आहत कर रही है। ऐसे लोगों के लिए धर्म सत्ता पाने का साधन है और मंदिर इन लोगों के लिए पैसा कमाने का एक जरिया है।
सपा नेता ने आरोप लगाया कि भगवान राम के नाम पर देशभर के लोगों ने श्रद्धा और विश्वास के साथ चंदा दिया था, लेकिन अब सामने आ रही जानकारियां कई सवाल खड़े कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर चंदे के पैसे के इस्तेमाल में किसी तरह की अनियमितता हुई है तो इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
राजीव राय ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और इससे जुड़े किसी भी आर्थिक लेन-देन में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग धर्म और आस्था का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ और आर्थिक फायदे के लिए कर रहे हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
यह मामला तब सुर्खियों में आया, जब समाजवादी पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 7 जून को सोशल मीडिया "X" पर एक पोस्ट के जरिए दावा किया कि राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी करोड़ों रुपये की रकम गायब पाई गई है। उन्होंने इसे भगवान राम के दुनियाभर में फैले भक्तों के लिए बेहद संवेदनशील और चिंताजनक खबर बताया था।
आरोप सामने आते ही उत्तर प्रदेश सरकार हरकत में आई और उसने तीन सदस्यीय एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन कर औपचारिक जांच शुरू कर दी। जांच की शुरुआत मंदिर में जमा होने वाले चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया और उससे जुड़े कर्मचारियों से पूछताछ के साथ हुई।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी कृष्ण मोहन की शिकायत पर राम जन्मभूमि थाने में आठ लोगों के खिलाफ गबन, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया गया। एफआईआर में राम शंकर यादव उर्फ टीनू, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडेय, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष चंद्र श्रीवास्तव को नामजद किया गया। पुलिस ने सभी आठों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके घरों से करीब 80 लाख रुपये नकद बरामद किए।
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में चढ़ावे की गिनती के दौरान कुछ कर्मचारियों द्वारा बार-बार नकदी छिपाने के मामले पाए गए, साथ ही सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली में भी गंभीर खामियां सामने आईं। जांच एजेंसियों ने कथित तौर पर डिलीट किए गए सीसीटीवी फुटेज भी बरामद किए, जिनकी जांच जारी है।
जांच में तेजी आने के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने 26 जून को अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। दोनों ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ रहे हैं, ताकि जांच निष्पक्ष ढंग से पूरी हो सके और ट्रस्ट की साख पर कोई प्रश्नचिह्न न लगे। ट्रस्ट की अगली बैठक में अध्यक्ष गोपाल दास महाराज की अध्यक्षता में यह इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया, और नए महासचिव की नियुक्ति होने तक ट्रस्टी कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई।