
Ram Mandir Donation Theft: राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में हुए कथित गबन के मामले ने अब सियासी तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत का आरोप है कि इस घोटाले को केंद्र सरकार के संरक्षण में अंजाम दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार आज भी इस मामले को लेकर गंभीर नहीं है। भगत ने कहा कि प्रशासन और सरकार का रवैया साफ बता रहा है कि उन्होंने FIR तक दर्ज नहीं की। करोड़ों भारतीयों की आस्था इससे जुड़ी होने के बावजूद न तो गंभीरता दिखाई गई और न ही संवेदनशीलता।
ANI से बात करते हुए भगत ने कहा कि सरकार ने FIR दर्ज करने की बजाय SIT का गठन कर दिया, जिससे साफ जाहिर होता है कि यह पूरा मामला सरकार के संरक्षण में हुआ और सरकार मुख्य आरोपियों को बचाने का काम कर रही है। भगत ने इसी वजह से मामले की न्यायिक जांच कराए जाने की मांग दोहराई।
इससे पहले गुरुवार को कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर तीखा हमला बोला था। वेणुगोपाल ने कहा कि पीएम मोदी की यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें, क्योंकि राम मंदिर आंदोलन ही उनके प्रधानमंत्री बनने की एक बड़ी वजह रहा है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी चोरी हो गई और सरकार खामोश बैठी है, जो भाजपा के दोहरे रवैये को उजागर करता है।
वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि भाजपा भगवान के नाम का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए कर रही है। उन्होंने इसी सिलसिले में पीएम मोदी को पत्र लिखकर मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराए जाने की मांग की। कहा कि इस चंदा चोरी ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।
गौरतलब है कि यह पूरा विवाद 25 जून को दर्ज हुई FIR के बाद शुरू हुआ था, जिसके बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। मामले में अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सभी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। जांच में अब तक करीब 79.80 लाख रुपए नकद बरामद किए जा चुके हैं। SIT की जांच में यह भी सामने आया है कि सबसे बड़ी हेराफेरी वर्ष 2025 के कुंभ मेले के दौरान हुई थी, जब मंदिर में चढ़ावा असामान्य रूप से बढ़ गया था।
एक आरोपी लव कुश मिश्रा के पैतृक घर से गोबर के नीचे छिपाए गए करीब 12 लाख रुपए भी बरामद हुए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच का दायरा बढ़ाने के लिए SIT की समयसीमा 15 जुलाई तक बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक इस मामले को CBI या किसी अन्य केंद्रीय एजेंसी को सौंपे जाने पर भी विचार किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने SIT की जांच का समर्थन करते हुए कहा है कि पुलिस पारदर्शी तरीके से जांच कर रही है और CBI जांच की मांग एक राजनीतिक स्टंट के अलावा कुछ नहीं है। पुलिस मामले से जुड़े प्रमुख लोगों के बयान लगातार दर्ज कर रही है और जांच अभी जारी है।