Ram Mandir Anniversary: 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में ऐतिहासिक बदलाव आया है। 2026 तक शहर धार्मिक ही नहीं बल्कि आर्थिक और पर्यटन का बड़ा केंद्र बन चुका है।
Ram Mandir Pran Pratishtha 2nd Anniversary Today: 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या पूरी तरह बदल गई है। अब 2026 में रामनगरी धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र बन चुकी है। यहां इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन और स्थानीय लोगों की जिंदगी में बड़ा उछाल आया है। करोड़ों श्रद्धालु यहां आते हैं, जिससे शहर में खुशहाली बढ़ी है।
प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में विकास की रफ्तार तेज हो गई। महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बन गया है, जिससे देश-विदेश से आसानी से लोग पहुंचते हैं। रेलवे स्टेशन को आधुनिक बनाया गया है और डबल लाइन ट्रेनें चल रही हैं। राम पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ जैसे चौड़े रास्ते बनाए गए हैं। पहले छोटी सड़कें थीं, अब चार लेन हाईवे हैं। अयोध्या अब देश का पहला सोलर सिटी भी बन चुकी है। करीब 85,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं चल रही हैं, जिससे शहर विश्व स्तर का हो रहा है। सुरक्षा और सुविधाएं भी बहुत बेहतर हो गई हैं।
प्राण प्रतिष्ठा से पहले अयोध्या में सालाना कुछ करोड़ पर्यटक आते थे, लेकिन अब संख्या बहुत बढ़ गई है। 2025 में ही 23 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु आए। रोजाना 2-4 लाख लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यह संख्या वाराणसी, मथुरा और आगरा से भी ज्यादा है। पर्यटन से होटल, गेस्ट हाउस, ट्रांसपोर्ट और दुकानों को फायदा हुआ है। अनुमान है कि 2028 तक अयोध्या का पर्यटन अर्थव्यवस्था 18,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। उत्तर प्रदेश की कुल पर्यटन आय में अयोध्या का हिस्सा 25% होने वाला है। धार्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक और हेरिटेज टूरिज्म भी बढ़ा है।
स्थानीय लोगों के लिए यह बड़ा मौका बना है। पहले जहां रोजगार कम थे, अब होटल, रेस्तरां, टैक्सी, गाइड, दुकानें और हस्तशिल्प में हजारों नौकरियां आई हैं। कई परिवारों की आय कई गुना बढ़ गई है। छोटे व्यापारी, ठेला लगाने वाले और होमस्टे चलाने वाले खुश हैं। अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है और शहर में नई ऊर्जा आई है। हालांकि निर्माण कार्य चलने से कुछ असुविधाएं हैं, लेकिन कुल मिलाकर जीवन स्तर ऊंचा हुआ है। लोग कहते हैं कि रामलला के आने से रामनगरी में सच्ची खुशहाली आई है। कुल मिलाकर, अयोध्या अब सिर्फ धार्मिक जगह नहीं, बल्कि विकास और समृद्धि का प्रतीक बन गई है।