
UP Politics: अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने यूपी-जापान बिजनेस कॉन्क्लेव को लेकर एक न्यूज़ एजेंसी को दिए गए बयान में योगी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने निवेश के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने कई मंत्रियों को निवेश लाने के लिए भेजा। लेकिन जमीन पर उसका असर दिखाई नहीं दे रहा है। अवधेश प्रसाद ने प्रदेश में बिजली संकट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सत्ता परिवर्तन के बाद ही विकास और रोजगार की स्थिति बदलने की उम्मीद की जा सकती है।
अयोध्या में सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने यूपी-जापान बिजनेस कॉन्क्लेव को लेकर योगी सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस समय परेशान हैं। सरकार की ओर से उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश आने के दावे किए गए। लेकिन उनके मुताबिक इन दावों का असर जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है। अवधेश प्रसाद ने कहा कि सरकार ने अपने कई मंत्रियों को निवेश जुटाने के लिए अलग-अलग जगह भेजा था। उस समय बड़े पैमाने पर उद्यमियों के उत्तर प्रदेश आने और निवेश होने की बात कही गई थी। उन्होंने दावा किया कि करीब 10 साल बीतने के बावजूद प्रदेश में एक भी बिजली का प्लांट नहीं लगा है।
सपा सांसद ने प्रदेश में बिजली संकट को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि बिजली की समस्या से लोगों को परेशानी हो रही है। प्रदेश में हाहाकार की स्थिति है। निवेश को लेकर किए जा रहे दावों को उन्होंने बेबुनियाद बताते हुए कहा कि केवल घोषणाओं से प्रदेश की तस्वीर नहीं बदलेगी।
अवधेश प्रसाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश में वास्तविक बदलाव सत्ता परिवर्तन के बाद ही संभव है। उन्होंने दावा किया कि जब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बनेंगे। और PDA की सरकार बनेगी। तभी प्रदेश में विकास, रोजगार और किसानों की समस्याओं के समाधान की उम्मीद की जा सकती है। उन्होंने महिलाओं के सम्मान और कानून-व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया। सपा सांसद ने कहा कि मौजूदा सरकार में इन समस्याओं के समाधान की कल्पना नहीं की जा सकती। उनके मुताबिक अखिलेश यादव की सरकार बनने के बाद ही रोजगार, किसानों की बदहाली, महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर प्रभावी काम हो सकेगा।
अवधेश प्रसाद का यह बयान ऐसे समय आया है। जब यूपी-जापान बिजनेस कॉन्क्लेव के जरिए उत्तर प्रदेश में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। उनके बयान से एक बार फिर प्रदेश में निवेश और विकास के मुद्दे पर सपा और भाजपा सरकार के बीच राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत हैं।