अयोध्या

Ram Mandir Secretary: कौन हैं जगदीश आफले? राम मंदिर निर्माण से लेकर ट्रस्ट की कमान तक, CEO से पहले सचिव की नियुक्ति क्यों है अहम?

Ram Mandir Ayodhya: राम मंदिर ट्रस्ट ने CEO की नियुक्ति से पहले जगदीश आफले को पहला सचिव बनाया है। जानिए उनका करियर, राम मंदिर निर्माण में भूमिका और यह नियुक्ति क्यों मानी जा रही है अहम।
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Updated: 29 Jul 2026, 8:32 AM IST
Jagdish Afale Ram Mandir Secretary Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust
जगदीश आफले बने पहले सचिव

Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust: राम मंदिर में दान चोरी के मामले के बाद ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में लगातार बदलाव किए जा रहे हैं। इसी क्रम में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति से पहले सचिव पद पर नियुक्ति करने का फैसला लिया है। इस जिम्मेदारी के लिए जगदीश आफले को चुना गया है। ट्रस्ट की ओर से उनकी नियुक्ति की औपचारिक घोषणा 2 सितंबर को होने वाली बैठक में की जाएगी।

सिर्फ सचिव ही नहीं, उन्हें ट्रस्ट के बैंक खातों के संचालन के लिए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (Authorized Signatory) भी बनाया गया है। ऐसे में उनकी भूमिका अब मंदिर के प्रशासनिक और वित्तीय दोनों कामकाज में अहम मानी जा रही है।

कौन हैं जगदीश आफले?

महाराष्ट्र के पुणे निवासी जगदीश आफले पेशे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं। उन्होंने आईआईटी मुंबई से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक और एमटेक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों में काम किया। यूरोप और अमेरिका की कंपनियों में भी उन्होंने लंबे समय तक सेवाएं दीं। सेवानिवृत्ति के बाद जब राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई तो उन्होंने अपने पेशेवर अनुभव को मंदिर निर्माण परियोजना के लिए समर्पित कर दिया। बताया जाता है कि उन्होंने बिना वेतन परियोजना प्रबंधक (Project Manager) के रूप में जिम्मेदारी संभाली और निर्माण कार्य की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

RSS से पुराना जुड़ाव

जगदीश आफले बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे हैं। राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ होने के बाद संघ की ओर से उन्हें परियोजना प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई। तभी से वह अयोध्या में रहकर मंदिर निर्माण से जुड़े कार्यों का संचालन कर रहे हैं।

CEO से पहले सचिव की नियुक्ति क्यों हुई?

राम मंदिर ट्रस्ट ने पहले ही CEO, सचिव और प्रवक्ता जैसे नए प्रशासनिक पद बनाने का फैसला किया था। हालांकि CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो सकी है। ट्रस्ट के अनुसार, CEO पद के लिए करीब 5,200 आवेदन आए हैं। इनकी जांच और चयन की प्रक्रिया सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली की अध्यक्षता वाली समिति कर रही है। चूंकि इस प्रक्रिया में समय लगना तय है, इसलिए प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए पहले सचिव की नियुक्ति कर दी गई।

बैंक खातों के संचालन में भी निभाएंगे अहम भूमिका

पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के पद छोड़ने के बाद ट्रस्ट के बैंक खातों के संचालन को लेकर नई व्यवस्था बनाने की जरूरत पड़ी थी। इसी के तहत ट्रस्ट ने जगदीश आफले को अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता बनाने का प्रस्ताव भारतीय स्टेट बैंक को भेजा। शुरुआती स्तर पर कुछ कानूनी प्रक्रियाओं के कारण खाते के संचालन में देरी हुई, लेकिन बाद में ट्रस्ट की ओर से नया प्रस्ताव भेजे जाने के बाद बैंक ने इसे मंजूरी दे दी। अब ट्रस्ट के खातों का संचालन सामान्य रूप से शुरू हो चुका है।

दान चोरी के बाद क्यों बढ़ी प्रशासनिक सख्ती?

हाल ही में राम मंदिर में दान राशि की कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठे। इसके बाद प्रशासनिक ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए गए। सचिव पद का सृजन और नियुक्ति भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले समय में ट्रस्ट प्रवक्ता की नियुक्ति भी करेगा, ताकि आधिकारिक जानकारी एक तय व्यवस्था के तहत सार्वजनिक की जा सके।

अब आगे क्या होगा?

2 सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में जगदीश आफले की नियुक्ति पर औपचारिक मुहर लगने की संभावना है। इसके बाद वह सचिव के रूप में अपनी जिम्मेदारियां संभालेंगे। वहीं CEO और प्रवक्ता की नियुक्ति की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाएगी। माना जा रहा है कि नए प्रशासनिक ढांचे के जरिए राम मंदिर ट्रस्ट वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में काम करेगा।

Updated on:
29 Jul 2026, 8:32 AM IST
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