
आजमगढ. कप्तानगंज थाना क्षेत्र में शनिवार की सुबह जंगली जानवरों के बीच नवजात की चीख सुन दैनिक क्रिया के लिए निकले ग्रामीण दंग रह गये। ग्रामीणों के पहुंचने पर मानवीय संवेदना दिखाने वाले जंगली जानवर तो विलुप्त हो गये लेकिन मांस भंक्षी जानवरों के चंगुल से बचे नवजात को देख हर कोई इंसानियत और हैवानियत के बीच अंतर समझने को विवश दिखा।
बात हो रही है कप्तानगंज थाना क्षेत्र के मोखलिसपुर गांव की। इस गांव के भृगुनाथ मौर्य ने अपने खेत में गन्ने की फसल बो रखी है। शुक्रवार की रात किसी समय अनचाहे नवजात शिशु को जन्म देने के बाद जन्म देने वाली युवती उसे भाग्य भरोसे छोड़कर गन्ने के खेत में फेंक चल गयी।
शनिवार की सुबह दैनिक क्रिया के लिए निकले ग्रामीण जब खेत के पास से गुजरते समय नवजात के रोने की आवाज सुने तो अवाक रह गये। मौके पर तमाम ग्रामीण जुटे और जब खेत में घुसे तो वहां का हैरतअंगेज दृश्य देख ईश्वरीय कृपा को मानने के लिए विवश हो गये। नवजात के समीप दो सियारों को देख लोगों ने दांतो तले अंगुली दबा ली कि मांस भक्षी जानवरों के बीच यह नवजात जीवित कैसे। खैर जो भी हो इसे ईश्वरीय कृपा कही जायेगी कि मांस भक्षण करने वाले दो जंगली जानवरों के बीच जीवित मिले नवजात को आखिर जिन्दगी कैसे मिली। घटना की जानकारी पाकर गांव के लोग मौके पर जुटे और लावारिश मिले नवजात को ईलाज के लिए स्थानीय सीएचसी ले जाया गया। आवश्यक कार्यवाही के बाद मुखलिसपुर गांव की रहने वाली कई बच्चों की मां रही बासमती पत्नी रामहित ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए नवजात को अपनाने का निर्णय लिया और वहां मौजूद लोगों की सहमति के बाद लावारिस नवजात को सीने से लगाकर अपने घर लौट गयी। क्षेत्र में इस घटना की चर्चा जोरों पर है।
Input- रणविजय सिंह