आजमगढ़

Azamgarh News: निजामाबाद ब्लैक पॉटरी को वैश्विक पहचान, ODOP योजना से कारीगरों को बड़ा लाभ

आजमगढ़ के निजामाबाद की ब्लैक पॉटरी को योगी सरकार की ODOP योजना से नई पहचान मिली, जिससे कारीगरों को वैश्विक बाजार, आधुनिक सुविधाएं और बेहतर आय के अवसर प्राप्त हुए।

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Apr 03, 2026
ODOP योजना से चमकी आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी, अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी मांग (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

Azamgarh News Nizamabad Pottery: उत्तर प्रदेश का आज़मगढ़ जनपद अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्पकला के लिए देश-विदेश में जाना जाता रहा है। खासकर निजामाबाद क्षेत्र की ब्लैक पॉटरी (काली मिट्टी की कारीगरी) ने एक अलग ही पहचान बनाई है। यह शिल्प न केवल अपनी कलात्मक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसकी निर्माण प्रक्रिया और उपयोग में आने वाली स्थानीय मिट्टी इसे विशिष्ट बनाती है। समय के साथ यह पारंपरिक कला आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप खुद को ढालते हुए अब वैश्विक मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही “एक जिला एक उत्पाद” (ODOP) योजना ने इस पारंपरिक शिल्प को नई दिशा और पहचान दी है। इस योजना के अंतर्गत कारीगरों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, वित्तीय सहयोग और विपणन के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे उनके उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रहे हैं।

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निज़ामाबाद की ब्लैक पॉटरी: परंपरा और कला का संगम

निजामाबाद क्षेत्र में ब्लैक पॉटरी का इतिहास कई पीढ़ियों पुराना है। यहां के कारीगर पारंपरिक तकनीकों का उपयोग करते हुए मिट्टी को खूबसूरत कलाकृतियों में बदलते हैं। इस कला में प्रयुक्त चिकनी मिट्टी स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध होती है, जो इस शिल्प की गुणवत्ता और विशिष्टता को बनाए रखती है।

वर्तमान में इस क्षेत्र में 200 से अधिक कारीगर इस कला से जुड़े हुए हैं। ये कारीगर फूलदान, बर्तन, चायदान, शक्करदान, सजावटी वस्तुएं और धार्मिक प्रतिमाएं तैयार करते हैं। इन उत्पादों में पारंपरिक डिजाइन के साथ-साथ आधुनिक शैली का भी समावेश देखने को मिलता है, जिससे यह घरेलू उपयोग के साथ-साथ सजावट के लिए भी अत्यंत लोकप्रिय हो गए हैं।

आर्थिक मजबूती का आधार बना पारंपरिक उद्योग

आजमगढ़ का ब्लैक पॉटरी उद्योग न केवल सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था का भी एक मजबूत स्तंभ है। कृषि के साथ-साथ यह शिल्प उद्योग हजारों लोगों के जीवन यापन का साधन बना हुआ है। विशेष रूप से कुम्हार समुदाय के लिए यह कला उनकी आजीविका का मुख्य स्रोत है।

त्योहारों और मेलों के दौरान मिट्टी से बनी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं की मांग बढ़ जाती है। गणेश, लक्ष्मी, शिव, दुर्गा और सरस्वती की सुंदर प्रतिमाएं लोगों की आस्था और कला का अद्भुत मेल प्रस्तुत करती हैं। इन उत्पादों की मांग अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी तेजी से बढ़ रही है।

ब्लैक पॉटरी की अनूठी निर्माण प्रक्रिया

ब्लैक पॉटरी की सबसे खास पहचान उसका गहरा काला रंग और चमकदार फिनिश है। इसे प्राप्त करने के लिए कारीगर विशेष तकनीक का उपयोग करते हैं। सबसे पहले मिट्टी से बर्तन या वस्तु को आकार दिया जाता है। इसके बाद उसे सुखाकर एक विशेष घोल में डुबोया जाता है, जो मिट्टी और वनस्पति तत्वों से तैयार किया जाता है।

फिर इन वस्तुओं को विशेष भट्ठियों में पकाया जाता है, जहां नियंत्रित तापमान और धुएं की प्रक्रिया के माध्यम से उनका रंग गहरा काला हो जाता है। अंतिम चरण में पारा, रांगा और सीसा जैसे तत्वों का उपयोग कर उन्हें आकर्षक चमक दी जाती है। यह पूरी प्रक्रिया अत्यंत मेहनत और कौशल की मांग करती है, जो पीढ़ियों से कारीगरों द्वारा सीखी और सहेजी गई है।

कॉमन फैसिलिटी सेंटर से मिला आधुनिकता का साथ

योगी सरकार द्वारा कारीगरों के उत्थान के लिए कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) की स्थापना एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है। इस केंद्र के माध्यम से कारीगरों को आधुनिक मशीनें, उपकरण और प्रशिक्षण की सुविधा मिल रही है। इससे उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और समय पर ऑर्डर पूरा करना भी संभव हो पाया है।

निज़ामाबाद ब्लैक पॉटरी फाउंडेशन के निदेशक संजय कुमार यादव बताते हैं कि पहले जहां कारीगरों को सीमित संसाधनों के कारण कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था, वहीं अब CFC की सुविधा मिलने से उनके काम में गति और गुणवत्ता दोनों आई है। अब वे बड़े ऑर्डर भी आसानी से और समय पर पूरा कर पा रहे हैं, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

ODOP योजना से मिली नई पहचान

“एक जिला एक उत्पाद” योजना के अंतर्गत ब्लैक पॉटरी को विशेष प्रोत्साहन दिया गया है। इस योजना के तहत कारीगरों को न केवल प्रशिक्षण दिया गया, बल्कि उनके उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग भी की गई। सरकारी और निजी स्तर पर आयोजित प्रदर्शनियों, मेलों और एक्सपो में इन उत्पादों को प्रदर्शित किया गया, जिससे इन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। इसके अलावा, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी इन उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा दिया गया है। इससे कारीगरों को सीधे ग्राहकों से जुड़ने का अवसर मिला और बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ी मांग

ब्लैक पॉटरी की खूबसूरती और विशिष्टता के कारण इसकी मांग अब विदेशों में भी तेजी से बढ़ रही है। यूरोप, अमेरिका और एशिया के कई देशों में इन उत्पादों की मांग बढ़ी है। विदेशी ग्राहक विशेष रूप से इनकी पारंपरिक डिजाइन और हस्तनिर्मित गुणवत्ता को पसंद करते हैं। सरकार द्वारा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भी कई पहल की गई हैं, जिससे कारीगरों को वैश्विक बाजार तक पहुंचने में मदद मिली है। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई है, बल्कि भारत की पारंपरिक कला को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मान मिला है।

युवाओं की बढ़ती भागीदारी

पहले जहां यह कला केवल बुजुर्ग कारीगरों तक सीमित थी, वहीं अब युवा पीढ़ी भी इसमें रुचि लेने लगी है। आधुनिक डिज़ाइन, नई तकनीकों और बाजार की समझ के साथ युवा इस शिल्प को नए आयाम दे रहे हैं। सरकारी प्रशिक्षण कार्यक्रमों और वित्तीय सहायता के कारण युवाओं को इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। इससे न केवल बेरोजगारी कम हो रही है, बल्कि पारंपरिक कला का संरक्षण भी सुनिश्चित हो रहा है।

संरक्षण और संवर्धन की दिशा में प्रयास

प्रदेश सरकार द्वारा इस पारंपरिक कला के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। कारीगरों को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ उनके उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी प्रकार सरकारी सहयोग और बाजार समर्थन मिलता रहा, तो आने वाले समय में ब्लैक पॉटरी उद्योग और अधिक विकसित होगा और हजारों लोगों को रोजगार प्रदान करेगा।

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