यूपी निकाय चुनाव से पहले सपा ने बसपा को जोर का झटका दिया है। बसपा के कई नेता सपा में शामिल हो गए हैं।
यूपी निकाय चुनाव 2022 के लिए आरक्षण की घोषणा के साथ ही जोड़-तोड़ की राजनीति शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी ने मंगलवार को बसपा को जोर का झटका दिया। बसपा के कई नेता सपा में शामिल हो गए। उपचुनाव में सपा की जीत के बाद निकाय में दावेदारों की संख्या बढ़ गई है। इससे पार्टी के नेताओं में उत्साह भी बढ़ गया है।
बसपा को लगातार तोड़ रही सपा
समाजवादी पार्टी आजमगढ़ में बसपा को लगातार तोड़ रही है। विधानसभा चुनाव के पहले सपा ने बसपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर के पुत्र कमलाकांत को पार्टी में शामिल किया था। पार्टी ने उन्हें टिकट दिया तो वे दीदारगंज से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंच गए। इसके अलावा बसपा के दर्जन भर जिले के नेता सपा में शामिल हुए थे। अब निकाय चुनाव के पहले भी सपा के टार्गेट पर बसपा दिख रही है।
निकाय चुनाव से पहले भी टूटी बसपा
सपा के जिलाध्यक्ष हवलदार यादव मंगलवार को बसपा फूलपुर नगर पंचायत के मजबूत नेता निखिल जयसवाल को पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराई। निखिल के साथ दो दर्जन से अधिक लोग सपा में शामिल हुए। सपा अध्यक्ष ने दावा किया कि बसपा सहित दूसरे दलों के दर्जनों नेता सपा में शामिल होने के लिए तैयार हैं।
सपा में टिकट के लिए आए आधा दर्जन आवेदन
वहीं मंगलवार को सरफराज आलम उर्फ मंसूर भाई ने सपा कार्यालय पहुंचकर नगरपालिका के अध्यक्ष पद के टिकट के लिए दावेदारी की। इनके अलावा नगर पंचायत माहुल से नसीम अहमद, नगर पंचायत मार्टिनगंज से रामसकल यादव, जहानागंज से रामवृक्ष यादव सहित आधा दर्जन लोगों ने टिकट के लिए आवेदन किया।
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सपा का दावा, बीजेपी कर रही उत्पीड़न
जिलाध्यक्ष ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की वर्तमान सरकार छात्र, नौजवान, किसान, व्यापारी का उत्पीड़न कर रही है। एक हफ्ते से जीएसटी विभाग के छापे व्यापारियों के यहां पड़ रहे हैं। इससे छोटे और मझोले व्यापारियों में डर का माहौल है। लोग सपा की तरफ उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं।
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रामपुर उपचुनाव में लोकतंत्र की हत्या
हवलदार यादव ने कहा कि रामपुर सीट पर उपचुनाव में लोकतंत्र की हत्या की गई। बीजेपी ने जिस तरह प्रशासन का दुरुपयोग किया वह लोकतंत्र के इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज हो गया है। सरकार संविधान विरोधी है। वह संविधान को खत्म करना चाहती है।