
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में एक किसान परिवार ने सेब की खेती कर सबको चौंका दिया है। जरवल कस्बे के रहने वाले ताज मोहम्मद और उनके बेटे रिजवान ने यूट्यूब से जानकारी लेकर दो बीघा जमीन में सेब का बाग लगाया। आज उनका बाग फलों से लदा है। दूर-दूर से किसान इसे देखने पहुंच रहे हैं। उनकी सफलता अब प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।
बहराइच जिले के जरवल कस्बे में रहने वाले किसान ताज मोहम्मद और उनके बेटे रिजवान ने यह साबित कर दिया है कि मेहनत और सही जानकारी के दम पर प्रदेश में भी सेब की सफल खेती की जा सकती है। जिस फसल को आमतौर पर जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश से जोड़ा जाता है। वही सेब अब बहराइच की धरती पर भी लहलहा रहा है। रिजवान बताते हैं कि वह पारंपरिक खेती से हटकर कुछ नया करना चाहते थे। इसी दौरान उन्होंने यूट्यूब पर सेब की खेती से जुड़ा एक वीडियो देखा। वीडियो से प्रेरित होकर उन्होंने जम्मू-कश्मीर के किसानों से संपर्क किया। और उनसे खेती की बारीकियां सीखीं। किसानों ने उन्हें पौधे उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनकी देखभाल के तरीके भी बताए।
वर्ष 2023 में रिजवान ने जम्मू-कश्मीर से 160 सेब के पौधे ऑनलाइन मंगवाए। एक पौधे की कीमत करीब 271 रुपये पड़ी। इन पौधों को दो बीघा खेत में लगाया गया। लेकिन शुरुआत में जानकारी की कमी के कारण करीब 30 पौधे सूख गए। इसके बाद उन्होंने 130 और पौधे मंगवाए। बेहतर गुणवत्ता वाले इन पौधों की कीमत करीब 1100 रुपये प्रति पौधा पड़ी। इनमें से भी कुछ पौधे सूख गए। वर्तमान समय में दो बीघा खेत में करीब 200 पौध फल देने लगे हैं।
ताज मोहम्मद बताते हैं कि पौधे लगाने के करीब 14 महीने बाद फल आने शुरू हो गए। पहले साल एक पौधे से 5 से 7 किलो तक फल मिले। दूसरे साल उत्पादन बढ़कर 30 से 40 किलो प्रति पौधा हो गया। उनका कहना है कि अच्छी देखभाल होने पर एक पौधा दो क्विंटल तक फल दे सकता है।
खेती की बेहतर जानकारी के लिए रिजवान ने शिमला की कृषि वैज्ञानिक डॉ. जीतू चौहान की ऑनलाइन क्लास भी जॉइन की। हर रविवार होने वाली इन कक्षाओं में रोग नियंत्रण, दवा छिड़काव और उत्पादन बढ़ाने की तकनीकें सिखाई जाती थीं। इससे उन्हें खेती में काफी मदद मिली। सेब की खेती में सफलता मिलने के बाद अब ताज मोहम्मद और रिजवान कीवी और ड्रैगन फ्रूट की खेती की तैयारी कर रहे हैं। उनका मानना है कि किसान यदि नई फसलों और आधुनिक तकनीकों को अपनाएं तो खेती को लाभदायक व्यवसाय बनाया जा सकता है।
रिजवान का अनुमान है कि अगले वर्ष एक पौधे से 60 से 80 किलो तक उत्पादन मिल सकता है। दो बीघा में लगे करीब 200 पौधों से औसत उत्पादन 120 क्विंटल तक होने की उम्मीद है। उनका कहना है कि यदि बाजार भाव अच्छा रहा तो बाग से ही पूरी फसल आसानी से बिक जाएगी।