
मार्च निकालने पर रेजिडेंट डॉक्टर सस्पेंड
Bahraich Resident Doctor Suspended: बहराइच मेडिकल कॉलेज के एक रेजिडेंट डॉक्टर को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में बिना अनुमति मार्च निकालना महंगा पड़ गया। कॉलेज प्रशासन ने इसे संस्थान के नियमों का उल्लंघन मानते हुए डॉक्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित कर दी गई है।
जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र के अमरावती जिले के नाखुर निवासी डॉ. रूपक इखे बहराइच के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में रेजिडेंट डॉक्टर हैं और उच्च चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि शुक्रवार को डॉ. रूपक इखे ने दिल्ली में धरना दे रहे सोनम वांगचुक के समर्थन में बहराइच में बिना कॉलेज प्रशासन की अनुमति पैदल मार्च निकाला। इस दौरान उन्होंने सरकार की नीतियों को लेकर भी अपनी राय सार्वजनिक रूप से रखी। मार्च की जानकारी जैसे ही मेडिकल कॉलेज प्रशासन को मिली, मामला प्राचार्य डॉ. संजय खत्री तक पहुंचा। प्रशासन ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए तत्काल कार्रवाई की।
प्राचार्य डॉ. संजय खत्री ने रेजिडेंट डॉक्टर को निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए। साथ ही मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पांच सदस्यीय जांच समिति बनाई गई है। कॉलेज प्रशासन के अनुसार, समिति की अध्यक्षता सीएमएस डॉ. एस.के. वर्मा करेंगे। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद यह तय किया जाएगा कि आगे क्या विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि फिलहाल डॉक्टर को निलंबित किया गया है और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच में यह देखा जाएगा कि बिना अनुमति मार्च निकालने और सार्वजनिक बयान देने के दौरान संस्थान के किन नियमों का उल्लंघन हुआ। रिपोर्ट आने के बाद यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि मेडिकल कॉलेज जैसे सरकारी संस्थानों में कार्यरत रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए सेवा नियम और आचार संहिता लागू होती है। ऐसे में किसी भी सार्वजनिक प्रदर्शन या विरोध कार्यक्रम में शामिल होने से पहले संस्थान की अनुमति जरूरी मानी जाती है। अब सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
सरकारी संस्थानों में कार्यरत कर्मचारी, अधिकारी और अन्य स्टाफ सेवा नियमों तथा आचार संहिता के तहत काम करते हैं। आमतौर पर सरकारी कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान या सार्वजनिक परिसर में किसी भी तरह का धरना, प्रदर्शन, रैली या विरोध कार्यक्रम आयोजित करने से पहले संबंधित प्रशासन या सक्षम अधिकारी से अनुमति लेना आवश्यक माना जाता है। बिना अनुमति प्रदर्शन करने पर इसे अनुशासनहीनता माना जा सकता है और संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय जांच, निलंबन या अन्य प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, विभिन्न विभागों, राज्यों और संस्थानों के सेवा नियम अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए अंतिम निर्णय संबंधित संस्थान की आचार संहिता और लागू सरकारी नियमों के आधार पर लिया जाता है।
Updated on:
20 Jul 2026 08:03 am
Published on:
20 Jul 2026 08:03 am
