बहराइच

हार्निया की थी बीमारी हाइड्रोसील का कर दिया ऑपरेशन, खून बहता रहा झोलाछाप नहीं कर पाया ट्रीटमेंट

Hernia Patient Wrong Surgery : बहराइच में एक झोलाछाप की लापरवाही से एक व्यक्ति की जान चली गई। आरोप है कि झोलाछाप ने हार्निया के बजाय हाइड्रोसील का ऑपरेशन कर दिया।

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मौत, PC- Patrika

बहराइच : बहराइच में एक झोलाछाप की लापरवाही से एक व्यक्ति की जान चली गई। फखरपुर क्षेत्र के भिलौरा मोड़ स्थित एक कथित क्लिनिक में हार्निया का इलाज पहुंचे 31 वर्षीय अमरेश की गलत ऑपरेशन के बाद मौत हो गई। आरोप है कि झोलाछाप ने हार्निया के बजाय हाइड्रोसील का ऑपरेशन कर दिया, जिससे बारीक नसें कट गईं और अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। अमरेश की हालत बिगड़ने से काफी ज्यादा रक्तस्राव हो गया, जिससे उसकी रास्ते में मौत हो गई।

बौंड़ी थाना क्षेत्र के बिस्वां गांव के रहने वाले अमरेश बीते लगभग एक साल से हार्निया की तकलीफ झेल रहे थे। परिवार बेहतर इलाज की तलाश में था। गांव की एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता के कहने पर परिजन उन्हें भिलौरा मोड़ स्थित एक निजी क्लिनिक में ले गए, जहां ऑपरेशन की सुविधा होने और बाहर से विशेषज्ञ डॉक्टर बुलाने का दावा किया जाता था।

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हालत बिगड़ती गई लेकिन…इलाज नहीं मिला

मृतक के भाई राजेश का आरोप है कि सर्जरी के दौरान गंभीर लापरवाही हुई। उनका कहना है कि ऑपरेशन के बाद अमरेश की हालत बिगड़ती गई और लगातार खून बहता रहा, लेकिन क्लिनिक की ओर से समय पर समुचित इलाज नहीं दिया गया। परिजनों का आरोप है कि स्थिति गंभीर होने के बावजूद मरीज को रेफर करने में देरी की गई और बाद में लखनऊ ले जाने की सलाह देकर छुट्टी दे दी गई। रास्ते में ही अमरेश ने दम तोड़ दिया।

परिवार की शिकायत पर पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय कुमार शर्मा ने जांच के लिए टीम गठित करने और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही आई सामने

प्रदेश में अवैध और अपंजीकृत क्लिनिकों का मुद्दा नया नहीं है। इससे पहले भी कई जिलों में कथित झोलाछाप डॉक्टरों की लापरवाही से मरीजों की मौत के मामले सामने आ चुके हैं। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, आर्थिक मजबूरी और जागरूकता के अभाव के कारण लोग ऐसे क्लिनिकों का रुख करने को मजबूर हो जाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिना पंजीकरण चल रहे चिकित्सा केंद्रों पर कड़ी निगरानी और नियमित अभियान की आवश्यकता है। कार्रवाई के बाद भी यदि ऐसे केंद्र दोबारा सक्रिय हो जाते हैं तो यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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Updated on:
16 Feb 2026 06:28 pm
Published on:
16 Feb 2026 06:27 pm
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