
बहराइच : बहराइच में तीन होमगार्ड ने महसी एसडीएम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। होमगार्ड्स ने आरोप लगाया है कि SDM ने उन्हें भद्दी-भद्दी गालियां दी। होमगार्ड जवानों ने एसडीएम पर जातिसूचक अपशब्द कहने, शारीरिक उत्पीड़न कराने और जान से मारने की धमकी देने जैसे आरोप लगाए थे, जिसमें एक आरोप यह भी था कि चोटी काटने के संबंध में SDM ने बोला है। इस संबंध में उन्होंने जिला कमांडेंट सहित मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की थी।
जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी के निर्देश पर कराई गई जांच में संबंधित दिव्यांग व्यक्ति, तहसील कर्मचारी और शिकायतकर्ता होमगार्ड जवानों के बयान दर्ज किए गए। जांच रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी।
शिकायत पत्र में दावा किया गया था कि बुधवार को ड्यूटी के दौरान एक दिव्यांग फरियादी को एसडीएम के समक्ष प्रस्तुत करने पर वह नाराज हो गए और कथित तौर पर जातिसूचक गालियां दीं। आरोप यह भी था कि एसडीएम ने अपने गनर और चालक से होमगार्ड जवानों को दौड़ लगाने और उठक-बैठक कराने के निर्देश दिए तथा इसकी फोटो भेजने को कहा। इसके बाद उन्हें ड्यूटी स्थल से हटाने और जान-माल की धमकी देने का आरोप लगाया गया।
महसी कंपनी के होमगार्ड जवान राजाराम शुक्ला, रमाकांत मिश्र और राम कुमार तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि एसडीएम द्वारा ड्यूटी व्यवस्था में मनमानी की जा रही है, जिससे उन्हें 24 से 48 घंटे तक लगातार ड्यूटी करनी पड़ती है।
रमाकांत मिश्र ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला और एसडीएम को निलंबित नहीं किया गया तो वे आत्महत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर होंगे।
एसडीएम आलोक प्रसाद ने पहले ही आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया था। उन्होंने कहा था कि एक दिव्यांग फरियादी उनके चैंबर में जमीन पर घिसटते हुए आया था और कुर्सी पर बैठते समय गिरते-गिरते बचा, जबकि मौके पर मौजूद तीनों होमगार्ड जवान तमाशबीन बने रहे। इस पर उन्होंने केवल इतना कहा था कि उनमें संवेदनशीलता की कमी है। इसके अलावा किसी भी तरह के आरोपों से उन्होंने इनकार किया था।
महसी तहसील में तैनात एसडीएम आलोक प्रसाद पर उनकी सुरक्षा में लगे तीन होमगार्ड जवानों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों की प्रशासनिक जांच पूरी हो गई है। जांच में होमगार्ड जवानों के आरोपों को निराधार और असत्य पाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, शिकायतकर्ता अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य या प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके।
प्रशासन का कहना है कि जांच में किसी भी स्तर पर एसडीएम के खिलाफ आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है और मामला समाप्त मानते हुए रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है।