
श्रावस्ती. भगवान का रूप कहे जाने वाले डॉक्टर ही जब इंसानियत की सारी हदें पार कर जाए तो भरोसा किस पर किया जाए। डॉक्टर मरीजों के लिए भगवान होते है मगर जब यही भगवान शैतान बन जाये तो क्या हो? जी हां सूबे के मुखिया चाहे जितनी 102 और 108 एबुलेंस चलवा रहे हो चाहे जितना जच्चा - बच्चा की सुरक्षा के दावे कर ले मगर जमीनी हकीकत कुछ और ही है जिसका जीता जागता सुबूत आज श्रावस्ती जिले के मल्हीपुर में देखने को मिला जहां प्रसव के लिए गई प्रसूतिका को अस्पताल से भगा दिया गया और बीच चौराहे पर ही उसका प्रसव हो गया। शुक्र है उन महिलाओं का जिन्होंने धोती का पर्दा बनाकर प्रसव पीड़िता का प्रसव कराया, लेकिन विभाग पहले भी अंजान था और इतना कुछ हो जाने के बाद भी अनजान है।
बता दें कि मल्हीपुर थाना क्षेत्र के गंगाभागड़ गांव के मजरा मुरावन पुरवा की रहने वाली छोटका पत्नी छोटे लाल को शुक्रवार लीवर पेन शुरू हुआ जिस पर छोटका अपने पति छोटे लाल के साथ पीएचसी मल्हीपुर पहुंची जहां स्टाफ नर्स ने मल्हीपुर के सीएचसी में भेजा जहां स्टाफ नर्स द्वारा प्रसव में अभी समय है ये कहकर उसे भिनगा भेज दिया और भिनगा में भी यही बात कहकर उसे बहराइच रेफर कर दिया गया। वहां से उसे फिर वापस मल्हीपुर घर भेज दिया गया।और आज सुबह कब छोटका को ज्यादा लीवर पेन हुआ तो वह फिर सीएचसी मल्हीपुर पहुंचा जहां मौजूद डॉक्टर और स्टाफ नर्स ने महिला डॉक्टर के न आने की बात कहकर उसे अस्पताल से वापस कर दिया । छोटे लाल अपनी पत्नी को लेकर जैसे अस्पताल से कुछ दूरी पर चौराहे पर पहुंचा ही था कि उसकी पत्नी ने बीच चौराहे पर ही एक बच्चे को जन्म दिया। ये तो शुक्र है आसपास की महिलाओं का जिन्होंने ने धोती का पर्दा लगाकर छोटका का प्रसव कराया।
ये है श्रावस्ती जिले के पीएचसी और सीएचसी का हाल जहां ऐसे होता है मरीजों के साथ व्यवहार। अब आप इसे क्या कहेंगे ये है डॉक्टर और स्टाफ नर्स का असली चेहरा। ये कोई पहला मामला नहीं है अभी कुछ महीनों पहले ही ऐसा ही एक मामला इकौना में भी देखने को मिला था जहां अस्पताल गेट के पास सड़क पर ही महिला का प्रसव हो गया था। ऐसी घटनाएं जिले में होती रहती हैं मगर न सीएमओ को ये दिखता है और न जिम्मेदार लोगों को। वही इस मामले में सीएचसी अधीक्षक एसबी सिंह बताते हैं कि मामला संज्ञान में आया है मामले की जांच कराई जाएगी जो भी डॉक्टर या स्टाफ नर्स दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।