योजना से प्राप्त राशि को विभिन्न तरीको से खर्च कर रहीं महिलाएं
मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने जिले की महिलाओं के जीवन में एक नया सबेरा लाया है। इस राशि को किसी ने बहन ने सिलाई व्यवसाय को बढ़ाने में लगाया है, कोई हर माह बचत कर रही है। कुछ एक ने बेटी को उच्च शिक्षा दिलाने में राशि लगाई है। बहने योजना से प्राप्त राशि को विभिन्न तरीको से खर्च कर रहीं हैं। जानकारी के अनुसार इस योजना से जिले की लाडली बहनों को अब तक कुल 1194 करोड़ 62 लाख रुपए की राशि वितरित की जा चुकी है। यह राशि न केवल महिलाओं को आर्थिक संबल दे रही है, बल्कि जिले की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही है।
मप्र सरकार ने जून 2023 में इस योजना की पहली किश्त के रूप में 01-01 हजार रुपए की राशि महिलाओं के खाते में अंतरित की गई थी। जिले की 03 लाख 51 हजार 791 बहनों के खाते में 33 करोड़ 58 लाख रुपए की राशि जमा हुई थी। 12 सितंबर 2025 को इस योजना की 28 वीं किश्त के रूप में जिले की 03 लाख 47 हजार 634 बहनों के खाते में 41 करोड़ 96 लाख रुपए की राशि जमा हुई है। इस प्रकार लाड़ली बहना योजना में जिले की बहनों की खातों में अब तक कुल 1194 करोड़ 62 लाख रुपए की राशि आ चुकी है। इस राशि से महिलाएं सक्षम एवं आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर हैं।
शहर की रीता गौतम ने लाड़ली बहना योजना की राशि से अपने सिलाई के व्यवसाय को आगे बढ़ाया है। शहर की ही माधुरी खंडेलकर ने हर माह मिलने वाली राशि को बचत करके रखा है और वह इस राशि का अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलाने में खर्च करना चाहतीं हंै। निर्मला कोकोटे ने इस योजना की राशि अपनी पढ़ाई पर लगाई है और आज वह एमएसडब्ल्यू की पढ़ाई कर रही है। लाड़ली बहना योजना ने महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा को पुख्ता किया है। इस योजना में मिली राशि का उपयोग बहनें अटल पेंशन योजना में निवेश कर अपने भविष्य के लिए एक निश्चित पेंशन का इंतजाम कर रही हैं। कुछ बहनों ने इस योजना की राशि से प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना एवं प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में अपना बीमा कराया है।
इस योजना का लाभ पाकर बहनों ने अपने जीवन को नई दिशा दी है। कहीं सिलाई मशीन की आवाज़ आत्म निर्भरता की कहानी कहती है, तो कहीं छोटे व्यवसायों से महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं। कुछ महिलाओं के लिए पहले घर चलाना मुश्किल था, लेकिन अब उनकी समस्या का हल इस योजना ने कर दिया है। अब बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी हो रही हैं। सरकार का यह कदम लाड़ली बहनों के लिए बहुत बड़ा सहारा बना है।