
Dara Singh Chauhan Says CEC Gyanesh Kumar : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सामने आए आरोपों के बीच उत्तर प्रदेश सरकार के कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने कहा है कि यह मुद्दा देश के लिए प्राइमरी नहीं, बल्कि सेकेंडरी है। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है और जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।
मंत्री दारा सिंह चौहान बलिया में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उनसे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर उठे विवाद और निर्वाचन आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज कराई गई आपत्तियों के संबंध में सवाल किया गया। जवाब में उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में आरोपों की सत्यता और उनके पीछे की मंशा दोनों की जांच जरूरी है।
दारा सिंह चौहान ने कहा कि चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू की ओर से लगाए गए आरोपों के पीछे क्या मंशा थी, यह जांच का विषय है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित हैं या इनके पीछे किसी प्रकार का पूर्वाग्रह है। उनके मुताबिक, जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जानी चाहिए। यदि जांच में आरोपों से जुड़े तथ्य सही पाए जाते हैं तो भारत सरकार की ओर से नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने इस मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच की प्रक्रिया पूरी होने की बात कही।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद उस समय और चर्चा में आया, जब रिपोर्टों में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के कामकाज से जुड़े विभिन्न फैसलों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं। द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर आपत्ति दर्ज कराई। रिपोर्ट में मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण, फॉर्म-6 में बदलाव और निर्वाचन संबंधी डेटा के प्रबंधन जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, निर्वाचन आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन रिपोर्टों में बताए गए आंतरिक मतभेद के निष्कर्ष को खारिज किया है और कहा है कि आयोग के फैसले तीनों आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए।
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR भी प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और समूहों की ओर से सवाल उठाए गए हैं। दूसरी ओर निर्वाचन आयोग की ओर से प्रक्रिया को निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था के तहत संचालित किए जाने की बात कही गई है। रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता डेटा के प्रबंधन और कुछ तकनीकी प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठाए थे। इनमें मतदाता सूची के डेटाबेस के केंद्रीकरण और अधिकारियों की तकनीकी पहुंच से जुड़े मुद्दे भी शामिल बताए गए हैं।
कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने कहा कि आरोपों के आधार पर तत्काल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है। उनका कहना था कि पहले यह देखना जरूरी है कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और उन्हें किस परिस्थिति में उठाया गया। जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही जिम्मेदारी तय हो सकती है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित स्तर पर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इससे यह स्पष्ट है कि सरकार की ओर से इस मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच के परिणाम के आधार पर लेने की बात कही जा रही है।
मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े आरोपों को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हुई है। विपक्ष की ओर से निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं आयोग से जुड़े पक्ष ने फैसलों में किसी प्रकार के संस्थागत मतभेद की धारणा को खारिज किया है। इसी माहौल में बलिया में दारा सिंह चौहान का बयान सामने आया है। उन्होंने इस विवाद को देश के सामने मौजूद प्राथमिक मुद्दों की तुलना में सेकेंडरी बताते हुए जांच की प्रक्रिया पर जोर दिया। उनका कहना है कि आरोप सही हैं या नहीं, इसका फैसला जांच के बाद ही किया जाना चाहिए।
फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े आरोपों और दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को लेकर बहस जारी है। सार्वजनिक रूप से सामने आई रिपोर्टों में कई प्रशासनिक और तकनीकी मुद्दों का उल्लेख किया गया है, जबकि निर्वाचन आयोग की ओर से सर्वसम्मति से फैसले लिए जाने की बात कही गई है। ऐसे में अब जांच और संबंधित संस्थाओं की ओर से सामने आने वाले आधिकारिक तथ्यों पर निगाह रहेगी। दारा सिंह चौहान ने भी अपने बयान में यही संकेत दिया कि आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही तय होगी और यदि आरोप तथ्यात्मक रूप से सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।