बलिया

‘बुरे वक्त में कोई काम नहीं आता…’, कहते-कहते भावुक हो गए राज सिंह, बोले- सिर्फ परिवार ही अपना

Raj Singh Subhendu Adhikari PA murder case : शुभेंदु अधिकारी के PA हत्याकांड में गलत पहचान के कारण गिरफ्तार हुए बलिया के राज सिंह CBI जांच के बाद बेकसूर साबित होकर घर लौट आए हैं। भावुक होकर उन्होंने पुलिस की प्रताड़ना और एक कुर्ते के बिल द्वारा अपनी जान बचाने की पूरी कहानी सुनाई।
2 min read
May 23, 2026
Raj Singh
राज सिंह ने साझा किया दर्द, PC- ANI

बलिया : बलिया के राज सिंह शुभेंदु अधिकारी के PA हत्याकांड में बेकसूर साबित हुए हैं। पुलिस ने उनकी गलत पहचान की और राजकुमार की जगह राजसिंह को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन, CBI ने सबूतों के आधार पर राजसिंह को रिहा कर दिया और आरोपी राजकुमार को गिरफ्तार कर लिया।

राजसिंह ने घर पहुंचते ही मीडिया से बातचीत की और उन्होंने बताया कि उन्होंने इतने दिनों में क्या कुछ झेला। राजसिंह ने बताया कि मैं अयोध्या में भगवान श्री राम के दर्शन करने के लिए गया हुआ था। वहां से मैं अपने परिवार के साथ लौट रहा था। तभी अचानक SOG की टीम ने मुझे घेरकर गिरफ्तार कर लिया। पुलिस और SOG की टीम लगातार मुझ पर दबाव बना रही थी कि जल्दी से जल्दी यह स्वीकार कर लो कि तुमने अपराध किया है। अगर स्वीकार नहीं करोगे तो तुम्हारा एनकाउंटर कर देंगे। इतना कहते ही राज सिंह भावुक हो गए।

'जरूरत में कोई काम नहीं आता…'

राज सिंह मीडिया से बात करते हुए बताते हैं कि बुरे वक्त में कोई काम नहीं आता है। कोई काम नहीं आता…सिर्फ अपना परिवार ही काम आता है और कुछ दोस्त। फिर वह दीवार की तरफ इशारा करते हुए कहते हैं देखिए न मैं प्रदेश महासचिव हूं। लेकिन, कुछ भी काम नहीं आता। यह सिर्फ लाइम लाइट के लिए है। फिर उनसे सवाल होता है कि क्या यह फोटो आगे भी दीवार पर टंगी रहेगी। इस पर राजसिंह कहते हैं कि मुझे नहीं लगता है कि यह फोटो दंगी रहेगी। क्योंकि मेरे परिवार के लोग बताते हैं कि जब मैं पुलिस कस्टडी में था तो मेरे परिवार से मिलने के लिए कोई भी नहीं आया। वही लोग आए जो सिर्फ अपने थे। तो ऐसे में फिर इन सब का क्या काम?

कुर्ते के बिल ने राज सिंह को बचाया

राजसिंह कहते हैं कि मैं कुर्ते के 2800 रुपए के बिल की वजह से बच गया। अगर वह बिल मेरे पास नहीं होता तो पता नहीं पुलिस मेरे साथ क्या करती। मेरे लिए बिल और मॉल की सीसीटीवी फुटेज गवाही बनी और मैं निर्दोष साबित हुआ। सबसे बड़ी बात मुझे बंगाली नहीं आती थी और वह लोग आपस में अधिकतर बंगाली में ही बात करते थे।

CBI आने के बाद मिली राहत

राज सिंह आगे बताते हैं कि केस में CBI की एंट्री के बाद मुझे राहत मिली। जब मैं सीबीआई के अंडर में आया, तो मेरे साथ किसी प्रकार की कोई बदतमीजी नहीं हुई। सीबीआई के अफसरों ने बिना किसी राजनीतिक दबाव या प्रेशर के निष्पक्ष होकर बहुत अच्छे से जांच की। जो उन्होंने मुझसे पूछा, मैंने सच-सच बताया।

Updated on:
23 May 2026 02:18 pm
Published on:
23 May 2026 02:18 pm