
BSP MLA Umashankar Singh: बसपा के वरिष्ठ नेता और रसड़ा विधानसभा सीट से विधायक उमाशंकर सिंह का बुधवार देर रात नई दिल्ली में इलाज के दौरान निधन हो गया। वह लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर जीत दर्ज कर वह विधानसभा पहुंचने वाले पार्टी के इकलौते विधायक बने थे। इसके बाद उन्हें बसपा विधायक दल का नेता भी बनाया गया। उनके निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बसपा प्रमुख मायावती, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना समेत विभिन्न दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि दी।
बलिया की रसड़ा विधानसभा सीट से लगातार तीन बार विधायक रहे उमाशंकर सिंह को पूर्वांचल की राजनीति में मजबूत जनाधार वाले नेताओं में गिना जाता था। उन्होंने पहली बार 2012 में विधानसभा चुनाव जीता। इसके बाद 2017 और 2022 में भी लगातार जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पकड़ कायम रखी। स्थानीय स्तर पर उनकी पहचान ऐसे नेता की रही, जो क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहते थे और लोगों के बीच नियमित जनसंपर्क बनाए रखते थे।
2022 का विधानसभा चुनाव बसपा के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। पार्टी पूरे प्रदेश में सिर्फ एक सीट जीत सकी और वह सीट रसड़ा थी। उमाशंकर सिंह की इस जीत ने विधानसभा में बसपा का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया। पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें बसपा विधायक दल का नेता नियुक्त किया।
बसपा अध्यक्ष मायावती के प्रति उमाशंकर सिंह का समर्पण और दोनों के बीच का पारिवारिक रिश्ता भी काफी गहरा था। पिछले साल रक्षाबंधन पर मायावती से राखी बंधवाने के बाद 'टाइम्स ऑफ इंडिया' से खास बातचीत में उमाशंकर सिंह ने कहा था कि बहनजी सार्वजनिक जीवन में होने के बावजूद बेहद निजी स्वभाव की मानी जाती हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा मेरे प्रति अपनापन और चिंता दिखाई है। जब मैं बीमार था तो मार्च 2025 में वह बिना किसी पूर्व सूचना के मेरे घर मेरा हालचाल जानने पहुंच गई थीं। वापस लौटने के बाद भी वह लगातार मेरे बेटे को फोन कर मेरी सेहत के बारे में पूछती रहती थीं। ऐसा सिर्फ एक बहन ही कर सकती है।" उमाशंकर सिंह ने यह भी बताया था कि मायावती उनकी बेटी और बेटे, दोनों की शादी में शामिल हुई थीं। जब उनसे पूछा गया कि वह अपनी बड़ी बहन को क्या उपहार देंगे, तो उन्होंने कहा था, "मेरा उपहार उन्हें यही वादा था कि मैं यहां से कहीं नहीं जाऊंगा। मैं हमेशा उनके साथ और इस पार्टी के साथ रहूंगा।"
राजनीति के अलावा उमाशंकर सिंह व्यवसाय से भी जुड़े थे। उनकी 'छात्र शक्ति कंस्ट्रक्शन्स' नाम की कंपनी सड़क निर्माण के क्षेत्र में काम करती थी। इसके अलावा खनन, शिक्षा और होटल कारोबार में भी उनकी भागीदारी रही। 2022 के चुनावी शपथपत्र के अनुसार, उनके पास करीब 54.05 करोड़ रुपये की संपत्ति थी। इसमें लगभग 18.05 करोड़ रुपये की चल और 35.99 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति शामिल थी। शपथपत्र में उन पर करीब 13 करोड़ रुपये का कर्ज भी दर्ज था।
उमाशंकर सिंह का नाम बलिया में कटहल नाला पुल को लेकर हुए राजनीतिक विवाद में भी चर्चा में आया था। बलिया में एनएच-31 पर स्थित कटहल नाला के नवनिर्मित पुल को बिना सूचना और उद्घाटन के यातायात के लिए खोले जाने से यह विवाद शुरू हुआ। मंत्री दयाशंकर सिंह ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों को फटकार लगाई और आरोप लगाया कि ये अधिकारी बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के इशारे पर काम कर रहे हैं। उमाशंकर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मंत्री को नसीहत दी कि पुल केंद्र सरकार/एनएचएआई के अधीन है। साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि उन्होंने अपने आरोप और कारनामों को उजागर करना शुरू किया, तो मंत्री को छिपने की जगह नहीं मिलेगी। स्थानीय स्तर पर इसे पूर्वांचल और बलिया की राजनीति में राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई के रूप में देखा जाता है।
वर्ष 2026 में आयकर विभाग ने उमाशंकर सिंह और उनके करीबियों से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। जांच के दौरान उनके लखनऊ स्थित आवास और कार्यालय समेत अन्य परिसरों में कार्रवाई हुई। आयकर विभाग की कार्रवाई में उनके करीबियों से लगभग 10 करोड़ रुपये नकद मिलने की जानकारी सामने आई थी। उस समय विभाग की जांच कई दिनों तक चर्चा का विषय बनी रही थी।
उमाशंकर सिंह का राजनीतिक जीवन कानूनी विवादों से भी गुजरा। वर्ष 2017 में तत्कालीन राज्यपाल ने चुनाव आयोग की सिफारिश पर उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी थी। उन पर जनप्रतिनिधित्व कानून के उल्लंघन और अपने नाम पर सरकारी ठेके लेने के आरोप लगे थे। यह कार्रवाई लोकायुक्त की जांच और इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद हुई थी।
बाद में उमाशंकर सिंह ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उन्हें राहत मिली और मामला उनके पक्ष में गया। यह प्रकरण उत्तर प्रदेश की राजनीति में उन मामलों में शामिल रहा, जिनकी कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर व्यापक चर्चा हुई।