
7 साल की दिव्यांग रागिनी को लेकर क्या बोले DM, फोटो सोर्स- वीडियो ग्रैब X (@RajuSharmajour1)
Disabled Student Ragini Case: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के दिघेड़ा ग्राम सभा के रानीपुर गांव की 7 वर्षीय दिव्यांग छात्रा रागिनी की परेशानी अब जिला प्रशासन के संज्ञान में आ गई है। सोशल मीडिया के जरिए मामला सामने आने के बाद जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने रागिनी की मदद के लिए संबंधित अधिकारियों को उसके घर भेजा है।
जिलाधिकारी ने भरोसा दिलाया है कि रागिनी की जरूरतों को देखते हुए उसे आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ उसकी अन्य समस्याओं का भी समाधान कराया जाएगा। प्रशासन की इस पहल से परिवार को राहत और नई उम्मीद मिली है।
रागिनी कक्षा एक में पढ़ती है। वह रोजाना अपने घर से करीब 400 मीटर की दूरी पैदल तय कर स्कूल पहुंचती है। उसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह सिर्फ एक पैर के सहारे चलने को मजबूर है। कम उम्र में ही सामने आई इस परेशानी के बावजूद रागिनी पढ़ाई को लेकर उत्साहित है और स्कूल जाने की जिद करती है। हालांकि, बेटी को इस तरह अकेले चलते देखकर उसके परिजन लगातार चिंतित रहते हैं।
परिजनों के मुताबिक, रागिनी जब महज छह महीने की थी, तब उसके साथ हादसा हो गया था। उस समय उसे गोद में लेकर दवा लेने के लिए ले जाया जा रहा था। रास्ते में हुए हादसे में उसके एक पैर में गंभीर चोट आई और पैर बुरी तरह टूट गया। परिजनों ने अपनी क्षमता के अनुसार रागिनी का इलाज कराया, लेकिन उसका पैर पूरी तरह ठीक नहीं हो सका। समय के साथ यह समस्या गंभीर बनी रही और रागिनी को एक ही पैर के सहारे चलना पड़ रहा है।
परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे रागिनी का बेहतर और महंगा इलाज करा सकें। इलाज के लिए कई प्रयास किए गए, लेकिन बच्ची के पैर की समस्या दूर नहीं हो पाई। इसके बावजूद रागिनी ने पढ़ाई नहीं छोड़ी। वह स्कूल जाने के लिए लगातार प्रयास करती है और एक पैर के सहारे ही स्कूल तक पहुंचती है।
रागिनी की स्थिति से जुड़ा वीडियो सोशल मीडियापर सामने आने के बाद यह मामला जिला प्रशासन तक पहुंचा। वीडियो में बच्ची को एक पैर के सहारे स्कूल जाते देखा गया, जिसके बाद उसकी मदद की मांग तेज हुई। मामले का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने तत्काल संबंधित अधिकारियों को रागिनी के घर भेजने के निर्देश दिए।
DM के निर्देश पर दिव्यांगजन अधिकारी और डॉक्टरों की टीम रागिनी के घर पहुंची। अधिकारियों ने बच्ची की स्थिति की जानकारी ली और उसकी जरूरतों का आकलन किया। जिलाधिकारी ने कहना है, '' बिटिया को जिस भी तरह की दिक्कतें हैं वो सब दूर कर देंगे।'' जांच रिपोर्ट आने के बाद रागिनी को उसकी जरूरत के मुताबिक आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रशासन की ओर से मेडिकल सुविधा दिलाने की भी पहल की जा रही है।
जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने कहा है कि रागिनी की सिर्फ चिकित्सकीय समस्या ही नहीं, बल्कि परिवार की अन्य जरूरतों पर भी ध्यान दिया जाएगा। घर में शौचालय बनवाने की बात भी सामने आई है। प्रशासन ने भरोसा दिया है कि रागिनी और उसके परिवार को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
प्रशासन की पहल के बाद रागिनी के परिजनों को अब उम्मीद है कि उनकी बेटी को बेहतर इलाज और जरूरी सहायक उपकरण मिल सकेंगे। परिवार लंबे समय से उसकी परेशानी को लेकर चिंतित था। रागिनी की कहानी ने यह भी दिखाया है कि तमाम मुश्किलों के बावजूद वह पढ़ाई जारी रखने के लिए कितनी दृढ़ है। अब प्रशासन की मदद से उसके लिए स्कूल जाना और रोजमर्रा की जिंदगी आसान होने की उम्मीद है।
Updated on:
02 Sept 2026 12:12 pm
Published on:
02 Sept 2026 12:12 pm
