27 अगस्त 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

‘अंकल जी, अंकल जी!’ सैलाब में डूबते बेटे की वो आखिरी पुकार, लाचार देखते रह गए लोग

Nepal Flash Flood: यूपी के बलिया जिले के रहने वाले पन्नालाल की आवाज भावुकता से भर गई जब उन्होंने मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, 'सब कुछ खत्म हो गया है।' जिस कस्बे से वे भागे थे, वह पानी, कीचड़ और मलबे के नीचे लगभग पूरी तरह गायब हो चुका था।
2 min read
Google source verification
Nepal Flash Flood

नेपाल में बाढ़ का कहर (फोटो एएनआई)

Nepal Flash Flood: नेपाल में 26 अगस्त को भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे बसे गांवों और कस्बों में सुनामी जैसी पानी और कीचड़ की लहर उमड़ पड़ी। एक हिमनद के ढहने से बर्फीले मलबे का जबरदस्त प्रवाह शुरू हुआ, जिसने सैकड़ों जिंदगियों को निगल लिया। नेपाली पुलिस ने अब तक 270 शव बरामद किए हैं, लेकिन तलाशी अभियान जारी है। कई विदेशी पर्यटक भी लापता हैं। इस आपदा ने न सिर्फ नेपाल बल्कि सीमा से सटे इलाकों के लोगों को भी झकझोर दिया।

पन्नालाल की टूटी दुनिया

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रहने वाले पन्नालाल की आवाज भावुकता से भर गई जब उन्होंने एनडीटीवी से बात की। उन्होंने कहा, 'सब कुछ खत्म हो गया है।' जिस कस्बे से वे भागे थे, वह पानी, कीचड़ और मलबे के नीचे लगभग पूरी तरह गायब हो चुका था। पूरी रात बारिश होती रही, लेकिन वे तब तक डटे रहे जब तक हेलीकॉप्टर उन्हें निकालने नहीं आ गए। उनकी दुकान भी यहीं थी। हादसे के समय वे बाजार गए हुए थे। बेटा दुकान संभाल रहा था। अचानक फोन आया कि सैलाब आ गया है। फोन, कागज और जरूरी सामान सब पानी में बह गए।

आंखों के सामने उजड़ गया परिवार

पन्नालाल ने बताया कि उनकी भाभी और भतीजा सैलाब में बह गए। आंखों के सामने सब कुछ उजड़ गया। पास खड़े एक और पीड़ित ने याद करते हुए कहा कि मंजर बहुत भयानक था। सब कुछ इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने और बचने का मौका ही नहीं मिला।

अंकल जी… अंकल जी… की गुहार

उसी शख्स ने बताया, 'मेरे सामने ही इनका लड़का पानी में डूब गया। एक बच्चे को हमने शर्ट का कॉलर पकड़कर खींचकर बचा लिया। लेकिन उनके लड़के को नहीं बचा पाए। वह पानी में डूब चुका था, अब सिर्फ गर्दन नजर आ रही थी। फिर वह भी मलबे में समा गया।' वह 18 साल का था। डूबने से पहले मदद के लिए चिल्ला रहा था— 'अंकल जी… अंकल जी…' बालू में दबे उस बच्चे की गुहार सुनते-सुनते लोग लाचार खड़े रहे। चाहकर भी कोई उसे नहीं बचा सका। आंखों के सामने सैलाब में बह जाने का दर्द आज भी ताजा है।

लाचार नजरें और अधूरी कोशिशें

उस समय हालात इतने खराब थे कि लोग चाहकर भी किसी की मदद नहीं कर पाए। पानी और मलबे की लहर ने सब कुछ लील लिया। कई परिवारों के सदस्य लापता हैं। पन्नालाल जैसे कई लोग अब सिर्फ यादों और दर्द के साथ जी रहे हैं। हेलीकॉप्टर से निकाले गए लोग बताते हैं कि रात भर की बारिश और अचानक आई तबाही ने उन्हें हमेशा के लिए बदल दिया।

तलाशी जारी, जख्म अभी हरे

नेपाल में तबाही के बाद राहत और बचाव कार्य तेज हैं, लेकिन पीड़ित परिवारों के जख्म अभी भी हरे हैं। बालू में दबे बच्चे की 'अंकल जी' वाली पुकार कई लोगों के कानों में गूंज रही है। यह आपदा सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि अनगिनत टूटे सपनों और अधूरे परिवारों की कहानी है।

बड़ी खबरें

View All

बलिया

उत्तर प्रदेश

ट्रेंडिंग