बालोद जिले के 242 आंगनबाड़ी केंद्रों के पास स्वयं का भवन नहीं है। इसमें से 118 आंगनबाड़ी किराए के भवन औरे 48 केंद्र अन्य शासकीय भवनों में संचालित है। 86 केंद्र सामुदायिक भवन में संचालित है।
बालोद जिले के 242 आंगनबाड़ी केंद्रों के पास स्वयं का भवन नहीं है। इसमें से 118 आंगनबाड़ी किराए के भवन औरे 48 केंद्र अन्य शासकीय भवनों में संचालित है। 86 केंद्र सामुदायिक भवन में संचालित है। जिले में 90 केंद्रों के लिए राशि भी स्वीकृत हो गई है व कुछ जगहों पर काम शुरू हो गया है। जिला मुख्यालय के वार्ड-20 में भी शासकीय आंगनबाड़ी भवन नहीं है। इसके लिए वार्ड पार्षद ने महिला बाल विकास अधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा।
सामुदायिक भवन में किया जा रहा है। शहर में कुछ वार्डों में आंगनबाड़ी भवन के लिए जगह नहीं मिल रही है।
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मानसून सीजन दो माह बाद आने वाला है। जो आंगनबाड़ी केंद्र सामुदायिक भवनों में संचालित हैं, वहां परेशानी होगी। कुछ में भवन पानी टपकता है। मासूम बच्चों को राहत दिलाने विभाग को अभी से तैयारी कर लेना चाहिए। गांव हो चाहे गांव हो, भवन किराए में चाहिए तो एक हजार से नीचे बात नहीं होती है। ऐसे में भवन ढूंढने में परेशानी होती है।
जिला महिला बाल विकास अधिकारी किशन टंडन कांति से भी मोबाइल से संपर्क किया गया। उन्होंने फोन ही रिसीव नहीं किया।
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नगर पालिका बालोद के वार्ड-20 के पार्षद कासीमुद्दीन ने महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी किशन टंडन से मुलाकात कर भवन निर्माण के संदर्भ में चर्चा की। बताया कि वार्ड-20 बूढ़ापारा में आंगनबाड़ी किराए के भवन में संचालित होती है। बच्चों के बैठने एवं शौचालय व किचन की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण पालक अपने बच्चों को आंगनबाड़ी भेजने में कतराते हैं। हमारे पास शासकीय भूमि खसरा नंबर 659 एक में भूमि उपलब्ध है। शासन प्रशासन गंभीरता बरतें और भवन निर्माण की स्वीकृति दे। गर्मी में केंद्र का समय बदला। अब जर्जर आंगनबाड़ी केंद्र की जगह नए केंद्र की जरूरत है।