बालोद

जिसका पानी पीकर पीढिय़ां तर गईं उसकी गंदगी धोने में मर गई लोगों की संवेदनाएं

नगर का जीवन जिस तांदुला नदी के सहारे चल रहा है उसी जीवदायिनी में नगर की गंदगी छोड़ी जा रही है। कहा जाए पालने वाली मां के प्रति ऐसी उपेक्षा है।

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Mar 26, 2018
tandula river

बालोद. नगर का जीवन जिस तांदुला नदी के सहारे चल रहा है उसी जीवदायिनी में नगर की गंदगी छोड़ी जा रही है। कहा जाए कि पालने वाली मां के प्रति हमारी ऐसी उपेक्षा आगे हमारे लिए श्रापित बन सकती है। ये विडंबना ही है कि प्यास बुझाकर हम उसी गोद में शहर का अपशिष्ट पदार्थ छोड़ दे रहे हैं, उसके बाद उसी पानी को फिर शहर तक पहुंचाया जा रहा है, ओ भी सीधे, क्योंकि तांदुला नदी के पानी को साफ करने के लिए कोई फिल्टर प्लांट ही नहीं है और न ही कोई विकल्प।

आप सोच कर देखिए क्या हम अपने घर में दूषित पानी पीते हैं, या दूषित भोजन का उपयोग करते हैं? क्या हम अपने बच्चों को बीमार देखना चाहते हैं या फिर पूरे परिवार का सहारा हम खुद ही बीमार होना चाहते हैं? क्या इन सवालों का जवाब नगर का एक भी व्यक्ति दे सकता है? नहीं ना, तो फिर पालने वाली मां के साथ आपका व्यवहार कैसा हो ये आप सोचिए।

तांदुला नदी के सहारे ही बालोद नगर फला-फूला
ज्ञात रहे जब से इस नदी का जन्म हुआ है। वह कभी अपने फर्ज से पीछे नहीं हटी है। लाखों लोग इसके साफ पानी में अठखेलियां करते जीवन तर किए। इसी के माध्यम से हजारों लोगों को रोजगार मिलते रहा है। हरे-भरे मैदान, मेढ़ों पर ऊंचे-ऊंचे पेड़ तांदुला की ही देन है।

बालोद नगर भी इसी के सहारे फला-फूला और विकसित हुआ। लाखों घर इसी के रेत से तैयार हुए, पर भी उस मां के अस्तित्व को खत्म करने में सभी ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। उसके बाद भी ये मां ऐसी है कि अपनी संतानों की प्यास बुझाने में आज भी पीछे नहीं हट रही हैं।

ऐसे कामों में क्यों मर जाती है हमारी संवेदनाएं?
कहा जाए तांदुला नदी का दोहन, शोषण करने के बाद भी लोग ठोस रूप में दमदारी के साथ इस मां के अस्तित्व को बचाने के लिए सामने नहीं आ रहे हैं। शासन-प्रशासन, जनप्रतिनिधि मौन साधे हुए है।

शहर के संपन्न लोग, समाज, राजनीतिक संगठन भी ऐसी कोई भलाई का या कहा जाए बड़े रचनात्मक काम की ओर ध्यान नहीं देते नजर आ रहे हैं। ऐसे में कहा जाए किस काम का समाज संगठन, राजनीतिक पार्टियां जो इस ओर एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाना चाहता। दिखावे के आयोजन में हम लाखों रुपए फूंक देते हैं, पर ऐसे कामों में हमारी संवेदना क्यों मर जाती है?

छोड़ रहे हैं आधा दर्जन क्षेत्र के सिवरेज का पानी
जानकारी अनुसार तांदुला नदी में जिला अस्पताल, कुंदरूपारा, बस स्टेंड, आमापारा, गंजपारा आदि मोहल्ले का गंदा पानी इस नदी में छोड़ा जाता है। यही नहीं नगर के राइस मिल का भी गंदा पानी इसी नदी में मिल रहा है, पर ऐसे गंदे पानी को नदी में जाने से रोकने के लिए नगर पालिका के पास ही और न ही राइस मिलों के संचालकों के पास कोई योजना है।

हालांकि राईस मिल मालिकों का दावा है कि मिलों का पानी नदी में नहीं जाता, पर यह सच है कि तांदुला नदी के माध्यम से नगर गंदा पानी पी रहा है। ऐसे में नगरवासी तांदुला नदी से साफ पानी की आस लगाते हैं। जिम्मेदार लोग ही सफाई की जिम्मेदारी से ही भटक गए हैं इसलिए नदी में जलकुम्भी, गन्दगी से पट चुकी है।

गंदा पानी रोकने बैठक में करेंगे चर्चा
वार्ड 12 के पार्षद व नपा के उपाध्यक्ष पद्मनी साहू ने कहा तांदुला नदी की सफाई करना जरुरी हो गया है। इसमें सभी वर्ग के लोग आगे आएं और मिलकर नदी को प्रदूषित होने से रोकें। नदी में नगर के कई वार्डों से जा रहे गंदे पानी को रोकने के लिए नगर पालिका में चर्चा भी की गई है। ट्रांसपोर्ट नगर के पास से नाली निर्माण कर पांडेपारा के पास हीरापुर एनीकट के पास नाली में मिलाया जा सके इस मामले को जल्द ही पालिका के बैठक में उठाएंगे। वहीं नदी की सफाई के बारे में चर्चा करेंगे।

सभी मीलों में लगा है ट्रीटमेंट प्लांट
राइस मिल एशोसिएशन के अध्यक्ष मोहन भाई पटेल ने कहा तांदुला नदी की सफाई बहुत जरूरी है। नदी गन्दगी से पट रही है। शासन व नगर प्रशासन गंदे पानी को नदी में जाने से बचाने वाटरट्रीटमेंट प्लांट लगाए और नदी की सफाई कराए। नगर के सभी राईस मिल वाले अपने मिल में वाटरट्रीटमेंट लगाए हैं। राइस मिल का पानी अब नदी में नहीं जा रहा है।

Published on:
26 Mar 2018 12:46 am