
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत हो रहे निर्माण कार्यों की पोल खुल गई है। मोंगरी से भाठापारा तक 1.80 किमी सड़क के निर्माण में अनियमितता और गुणवत्ताहीन काम सामने आया है। 84.53 लाख रुपए की लागत वाली इस सड़क और नाली का काम देखकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। सबसे बड़ा खुलासा नाली निर्माण में हुआ। सड़क किनारे बनी नाली में एक भी सरिया नहीं डाली गई थी। पहली तेज बारिश में ही नाली पूरी तरह ध्वस्त हो गई।
ग्रामीणों का कहना है कि जीवन में पहली बार ऐसी नाली देखी, जिसमें सरिया का नहीं है। सिर्फ सीमेंट और ईंट जोड़कर खानापूर्ति कर दी गई। पानी का तेज बहाव आते ही नाली जगह-जगह से टूट गई। कुछ लोग कह रहे हैं कि शायद नाली में सरिया लगाने का प्रावधान ही नहीं है। प्रावधान नहीं है तो फिर घटिया निर्माण क्यों।
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सड़क की स्थिति इतनी बदतर है कि यहां से निकलना मुश्किल हो गया है। प्रतिदिन साइकिल, मोटरसाइकिल, स्कूल वैन और चारपहिया वाहन कीचड़ में फंस रहे हैं। बारिश से पहले सड़क पर मुरुम-गिट्टी डालकर दुरुस्त किया जाना था, लेकिन विभाग ने ध्यान नहीं दिया। नतीजा पूरा रास्ता कीचड़ में तब्दील हो गया है।
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सबसे ज्यादा परेशानी मोंगरी और सलोनी गांव के स्कूली बच्चों को हो रही है। मोंगरी-भाठापारा में स्कूल है। दोनों गांवों के बच्चे इसी रास्ते से आते-जाते हैं। कीचड़ के कारण बच्चों की ड्रेस और पुस्तकें गंदी हो जाती हैं। साइकिल से आने वाले बच्चों को कई बार पैदल ही स्कूल आना पड़ रहा है। ग्रामीण सुकृत साहू ने कहा कि बारिश से पहले ही मुरुम डाल दी जाती तो इतनी परेशानी नहीं होती।
इस सड़क का निर्माण कार्य मार्च 2027 तक पूरा किया जाना है। अभी से सड़क की यह दुर्दशा बता रही है कि काम की गुणवत्ता क्या होगी। ग्रामीणों को डर है कि कहीं यह सड़क एक साल भी न टिके।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के ईई शत्रुहन ध्रुव ने कहा कि सड़क और नाली की स्थिति का निरीक्षण किया जाएगा। टूटी नाली को ठेकेदार से दोबारा बनवाया जाएगा और सड़क निर्माण में तेजी लाई जाएगी। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जब तक अधिकारी मौके पर नहीं आएंगे और ठोस कार्रवाई नहीं होगी, तब तक उनकी परेशानी कौन दूर करेगा। निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषी ठेकेदार और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
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Updated on:
28 Jul 2026 11:27 pm
Published on:
28 Jul 2026 11:27 pm
