लिस विभाग के जागरुकता अभियान के बाद भी लोग साइबर क्राइम के प्रति जागरूक नहीं हो रहे हैं। पुलिस विभाग के मुताबिक बीते साल साइबर ठगों ने लगभग 770 लोगों से 2 करोड़ 77 लाख रुपए की ऑनलाइन ठगी की। इसमें शिकायत और दर्ज प्रकरण दोनों शामिल हैं।
पुलिस विभाग के जागरुकता अभियान के बाद भी लोग साइबर क्राइम के प्रति जागरूक नहीं हो रहे हैं। पुलिस विभाग के मुताबिक बीते साल साइबर ठगों ने लगभग 770 लोगों से 2 करोड़ 77 लाख रुपए की ऑनलाइन ठगी की। इसमें शिकायत और दर्ज प्रकरण दोनों शामिल हैं। अब नए साल में भी ठग विभिन्न स्कीम देकर ऑनलाइन ठगी करने के प्रयास में है। लेकिन नए साल में संकल्प लेने की जरूरत है कि साइबर ठगी से बचने के लिए खुद जागरूक होंगे और दूसरों को भी जागरुक करेंगे।
जिले में हर माह लगभग साइबर ठगी के 60 से 70 मामले आ रहे हैं। यह आंकड़े पुलिस विभाग के हैं। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतनी होगी। कोई अनजान लिंक में क्लिक न करें। अनजान कॉल से आए ऑफरों के लालच में न आएं। यही साइबर ठगी से बचाव का उपाय है।
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जिला पुलिस के साइबर सेल के मुताबिक जिले में साइबर ठगी के आए लगभग 870 मामलों में से नवंबर की स्थिति में 15 प्रकरणों में ही 5 लाख 51 हजार की राशि ही वापस हुई है। बाकी मामलों में कार्रवाई चल रही है।
पुलिस विभाग ने साइबर ठगी के मामले दर्ज करने के बाद पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल के निर्देशानुसार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम बनाकर कार्रवाई भी की है। अभी तक जितने मामले आए हैं, उसमें से कुछ मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। सभी ठग राजस्थान, बिहार, झारखंड, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किए गए हैं।
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जिला साइबर सेल प्रभारी धरम भुआर्य ने बताया कि राजस्थान व झारखंड साइबर ठगी के गढ़ हैं। लोकेशन के आधार पर साइबर सेल, पुलिस ने खुलासा किया है कि चार राज्य के 15 ठिकानों में साइबर ठग गिरोह सक्रिय होकर ठगी की वारदात को अंजाम दे रहे हैं। राजस्थान के जयपुर, जोधपुर, सीकर, झुझनुं, अलवर, भरतपुर, हरियाणा के नुंह, हिसार, झारखंड के जामताड़ा, करमाटांड़, मधुपुर, बिहार के नालंदा, नवादा, जमुई में साइबर ठगी करने वाले गिरोह सक्रिय हैं।
संदिग्ध फ्रॉड लिंक व ऐप की रोकथाम के लिए भारत सरकार ने प्ले स्टोर पर एम-रक्षा कवच-2 नाम का ऐप जारी कर रखा है। हर व्यक्ति को यह ऐप अपने मोबाइल में रखना चाहिए। यह ऐप मोबाइल को स्कैन कर आपके फोन का एक्सेस दूसरे प्लेटफॉर्म को देता है, उसको रोक देता है। फेसबुक, वाट्स ऐप और इंस्टाग्राम जैसी सोशल मीडिया का उपयोग भी सावधानी के साथ करना चाहिए। यदि कोई इन ऐप को हैक करता है तो, संबंधित थाना के साइबर सेल में जानकारी देकर आईडी बंद करवाई जा सकती है। साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत बैंक में सूचना देकर अपना खाता फ्रीज करवाएं। भारत सरकार के साइबर क्राइम पोर्टल या 1930 पर शिकायत दर्ज करवाएं। साथ ही संबंधित पुलिस थाना को सूचित करें।
साइबर ठगी से सामान्य वर्ग व कम पढ़े लिखे व्यक्ति के अलावा शिक्षित लोग भी ठगी के शिकार हुए हैं। पुलिस ने साइबर ठगी के हर मामलों में जांच कर ठगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है, लेकिन साइबर ठगी से बचने के लिए खुद को जागरूक होने की जरूरत है।
जिला साइबर सेल प्रभारी धरम भुआर्य ने कहा कि साइबर ठगी से बचने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। लेकिन साइबर ठगी के मामले हर माह आ रहे हैं। जागरुकता ही बचाव का उपाय है। साइबर ठग मोबाइल पर किसी माध्यम से फर्जी ऐप इंस्टॉल करवा कर उसे हैक करने की कोशिश कर सकते हैं। कोई भी फाइल जिसका अंत एपीके से हो, उसे डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। आपके किसी दोस्त या रिश्तेदार के मोबाइल से भी आपको सोशल मीडिया पर इस तरह का फाइल इंस्टॉल करने कहा जाए तो सावधान रहें। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर साइबर ठगों को गिरफ्तार कर ला रहे हैं। ठगों पर कार्रवाई जारी है।