हानगरों की तरह जिला अस्पताल में भी कमजोर नवजात बच्चों से लेकर 18 साल के दिव्यांग बच्चों को एक ही छत के नीचे इलाज मिलेगा। इसके लिए जिला अस्पताल परिसर में शासन ने डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेशन सेंटर (डीईआईसी) का निर्माण 15 डिसमिल जमीन पर किया है।
महानगरों की तरह जिला अस्पताल में भी कमजोर नवजात बच्चों से लेकर 18 साल के दिव्यांग बच्चों को एक ही छत के नीचे इलाज मिलेगा। इसके लिए जिला अस्पताल परिसर में शासन ने डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेशन सेंटर (डीईआईसी) का निर्माण 15 डिसमिल जमीन पर किया है। स्टाफ की भर्ती के बाद इसे शुरू किया जाएगा। इस सेंटर को शुरू होने में अभी 6 माह से एक साल का समय लग सकता है। इसके बाद कमजोर और बीमार बच्चों को दुर्ग, रायपुर, भिलाई व अन्य बड़े शहरों के अस्पतालों में रेफर करने की नौबत नहीं आएगी। वर्तमान में जिले में एक भी चाइल्ड हेल्थ यूनिट नहीं है।
नेशनल हेल्थ मिशन के तहत जिला अस्पताल परिसर में लगभग 93 लाख 55 रुपए की लागत से डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेशन सेंटर बनाया गया। इस केंद्र के लिए अलग से चिकित्सक व अन्य स्टाफ रहेगा। गर्भ में ही बीमारियों की चपेट में आने वाले बच्चों की देखभाल और समय से उन्हें इलाज मिलेगा।
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अभी तक राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएचके) के चिकित्सकों की टीम स्कूलों में भ्रमण कर बीमार बच्चों का चिन्हांकन करती है, जो बच्चे गंभीर बीमारियों से पीडि़त मिलते थे, उन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल एवं अन्य बड़े अस्पताल लेकर जाना पड़ता है। आरबीएचके की टीम को बच्चों को लेकर अलग-अलग डॉक्टरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब टीम से चयनित गंभीर बीमार बच्चों को एक ही छत के नीचे सभी विशेषज्ञ चिकित्सकों से उपचार सुविधा मिलेगी।
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स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक सेंटर में नवजात बच्चों में होने वाली गंभीर बीमारियों जैसे पैरों का टेढ़ा होना, मानसिक कमजोरी, बच्चों का देर से रोना, जन्म से कमजोर होना व जिनका पता काफी बाद में चलता है, उनकी जांच कर उपचार किया जाएगा। अभी तक सरकारी अस्पताल में इसकी सुविधा नहीं है, जिसके कारण मरीजों को जिले के बाहर निजी अस्पतालों पर निर्भर रहना होता है या फिर दुर्ग, भिलाई, धमतरी, राजनांदगांव, रायपुर या महानगरों के अस्पतालों में जाना पड़ता है। इंटरवेशन सेंटर बनने के बाद इस तरह की बीमारियों का उपचार यहीं हो सकेगा। प्रीमैच्योर बच्चों की देखरेख की जा सकेगी। सेंटर में फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी, दृष्टि दोष, दंत उपचार, दिल में सुराख, मानसिक रोग सहित 38 बीमारियों का इलाज किया जाएगा। जिन मरीजों का इलाज संभव नहीं होगा, उन्हें सरकारी और निजी क्षेत्र के उच्च चिकित्सा संस्थानों में भेजा जाएगा।
अस्पताल भवन बनकर तैयार है, लेकिन बड़ी बात यह है कि अभी स्टाफ भर्ती व उपकरणों को उपलब्ध कराने के बाद ही आगे की कार्यवाही की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की माने तो अभी तैयारी की जा रही है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बालोद डॉ. जेएल उइके ने कहा कि सीजीएमएससी विभाग ने इसे बनाया है। अब स्टॉफ भर्ती की जाएगी। उच्च अधिकारियों के दिशा निर्देशों के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी। इसकी सौगात से काफी राहत भी मिलेगी।