बालोद

आधा दर्जन गांव उजाड़े जाएंगे! बालोद में ‘लेटर बम’ से मचा हड़कंप, NOC पर बवाल

Balod News: केंद्र सरकार की नवरत्न कंपनी को फास्फोराइट और लाइमस्टोन ब्लॉक आवंटित किए जाने के बाद अब ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया है।

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Jun 07, 2026
Chhattisgarh News
बालोद में ‘लेटर बम’ से मचा हड़कंप (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Chhattisgarh News: बालोद जिले में जमीनी स्तर पर एक बड़ा औद्योगिक और सामाजिक टकराव खिंचता नजर आ रहा है। केंद्र सरकार की नवरत्न कंपनी इंडिया लिमिटेड को जिले के सेमहरडीह और रायपुरा क्षेत्र में फास्फोराइट और चूना पत्थर (लाइमस्टोन) के दो बड़े ब्लॉक आवंटित किए गए हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार के खनिज संसाधन विभाग द्वारा कंपनी को ‘कंपोजिट लाइसेंस’ जारी करने और जिला प्रशासन के साथ अनुबंध होने के बाद अब प्रभावित गांवों में हडक़ंप मच गया है। तहसीलदार द्वारा पंचायतों से अनापत्ति प्रमाण-पत्र मांगे जाने के बाद से ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा है। हालांकि अभी तक ग्राम पंचायत द्वारा एनओसी नहीं मिली है और ग्रामीणों ने कहा है कि एनओसी नहीं देंगे।

तहसीलदार ने कहा अभी मांगा गया है अनापत्ति प्रमाण-पत्र

तहसीलदार मार्रीबंगला देवरी प्रीतम कुमार साहू ने बताया कि शासन से आए आदेश पत्र के तहत संबंधित गांवों के ग्राम पंचायत सरपंचों से अनापत्ति प्रमाण-पत्र मांगे गए हैं पर अभी तक किसी भी ग्राम पंचायत से अनापत्ति प्रमाण-पत्र नहीं दिया है।

देश के लिए महत्वपूर्ण..

तकनीकी और आर्थिक दृष्टिकोण से बालोद जिले में यह अपनी तरह की पहली और सबसे बड़ी नीलामी है। फास्फोराइट जहां कृषि क्षेत्र में रासायनिक उर्वरकों (खाद) के निर्माण के लिए एक अनिवार्य कच्चा माल है। वहीं चूना पत्थर सीमेंट उद्योग और देश के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बेहद जरूरी है। घरेलू स्तर पर इन खनिजों के मिलने से भारत की कृषि और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी लेकिन इसके लिए स्थानीय आदिवासियों और किसानों को विस्थापित करना प्रशासन के लिए लोहे के चने चबाने जैसा होगा।

सरपंच बोले- नहीं देंगे सहमति, अधिकारी मौन

इस सरकारी पत्र के सामने आने के बाद से सेमहरडीह व रायपुरा समेत आसपास की 3 अन्य ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों को अपना अस्तित्व खतरे में नजर आ रहा है। उन्हें डर है कि यदि जांच में बड़ी मात्रा में खनिज मिलता है तो पूरे के पूरे गांवों को खाली करा दिया जाएगा।

ग्रामीणों ने सहमति देने से किया इनकार

कंपनी को सरकार से आधिकारिक पत्र प्राप्त होने के बाद गांव से अनापत्ति प्रमाण-पत्र मांगा गया है। लेकिन पंचायत और ग्रामीणों ने इस पर किसी भी प्रकार की सहमति देने से साफ इनकार कर दिया है। सरपंच रायपुर डेविड बारले ने कहा कि हम अपनी जमीनें और गांव किसी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।

क्या होता है कंपोजिट लाइसेंस?

यह प्रशासन द्वारा दिया जाने वाला एक दोहरा परमिट होता है। इसके तहत पहले चरण में कंपनी को संबंधित इलाके में विस्तृत वैज्ञानिक खोज (भूवैज्ञानिक मानचित्रण और खनिज का अनुमान) करने की छूट मिलती है। इसके बाद यदि वाणिज्यिक रूप से पर्याप्त मात्रा में खनिज की पुष्टि हो जाती है तो यह परमिट सीधे खनन पट्टे में तब्दील हो जाता है। साफ है कि शासन-प्रशासन को यहां बड़े भंडार की उम्मीद है।

नीलामी से पहले नहीं ली गई सहमति, ‘गुप्त’ खोज का लगाया गया आरोप

पत्रिका की टीम जब प्रभावित क्षेत्रों में जमीनी हकीकत जानने पहुंची तो ग्रामीणों ने एक सुर में इस पूरी परियोजना का विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि इस बेहद संवेदनशील और बड़े फैसले से पहले स्थानीय आबादी या ग्रामसभा से कोई राय नहीं ली गई। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और कंपनी द्वारा पहले से ही यहां गुप्त रूप से खनिजों की खोजबीन की जा रही थी, जिसकी भनक अब जाकर लगी है।

कंपनी को दोनों ब्लॉकों में मिला खनन का अधिकार

राज्य सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर कंपोजिट लाइसेंस जारी होने के बाद कंपनी को इन दोनों ब्लॉकों में विस्तृत भूवैज्ञानिक अन्वेषण का अधिकार मिल गया है। इसके तहत कंपनी जल्द ही प्रभावित इलाकों में बोर ड्रिलिंग कर जमीन के भीतर छिपे फास्फोराइट और लाइमस्टोन की सटीक मात्रा और गुणवत्ता की जांच शुरू करने वाली है।

Published on:
07 Jun 2026 10:30 am